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हड़ताल पर चले जाएंगे केबल ऑपरेटर

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वाराणसी। भारतीय दूर संचार विनियामक (ट्राई) 29 दिसंबर से देश भर में एमआरपी कानून लागू करने जा रहा है। इसके बाद जिस केबल टीवी का मासिक शुल्क लोग 200 से 250 रुपये दे रहे थे उसके बाद मनोरंजन के लिए 800 रुपये से भी अधिक शुल्क देना होगा। ऐसे में डीटीएच कंपनियों के सामने केबल टीवी नहीं टिक पाएगी और व्यवसाय चौपट हो जाएगा। इस काले कानून को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए वरना केबल ऑपरेटर हड़ताल को मजबूर होंगे। यह बात बनारस केबल टीवी ऑनर सोसाइटी के अध्यक्ष हरे राम रंजन ने गुरुवार को पराड़कर भवन में पत्रकारों से कही।
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उन्होंने कहा कि वाराणसी में संचालित तीन मल्टी सिस्टम ऑपरेटर में से एक सिटी केबल ने 10 दिसंबर से प्री पेड मॉडल में बदलाव करना शुरू कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे के अंदर प्री पेड मोड को समाप्त नहीं किया गया तो केबल ऑपरेटर हड़ताल पर चले जाएंगे। पदाधिकारियों ने कहा कि केबल आपरेटर 28 वर्षों से घर-घर में केबल के माध्यम से मनोरंजन व समाचार चैनलों का प्रसारण 200 से 250 रुपये में करते आ रहे हैं। उनके लिए यहीं एक मात्र आय का साधन है। उद्योगपतियों व देश में संचालित डीटीएच कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से काला कानून लागू करने का आदेश जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर जबरदस्त आक्रोश है। केबल ऑपरेटरों को समाप्त करने की साजिश की जा रही है। मध्यम वर्गीय गरीब जनता पर बोझ बढ़ाने की तैयारी है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यह काला कानून निरस्त नहीं किया गया तो हजारों आपरेटर व कर्मचारीगण हर जिले में आंदोलन करेंगे और संसद का घेराव करेंगे। इसके लिए घर घर जाकर लोगों को सरकार की नीतियों के बारे में बताएंगे। इस दौरान उपाध्यक्ष नवीन श्रीवास्तव, महामंत्री श्याम गुप्ता, संगठन मंत्री किशन यादव, आत्मा राम पांडे, संतोष राव, ओम प्रकाश ने भी अपनी बात रखी।
क्या है प्री पेड मोड--
पहले केबल ऑपरेटर उपभोक्ताओं से केबल का किराया महीने के बाद या अपनी सुविधा के अनुसार लेते थे, लेकिन नए कानून के पास हो जाने के बाद उपभोक्ताओं को पहले पैसा जमा करना होगा, उसके बाद वे केबल टीवी का उपयोग कर पाएंगे। सीधे शब्दों में समझें तो डीटीएच कंपनियों की तर्ज पर केबल ऑपरेटरों को भी पहले पैसा देना होगा। उसके बाद ही वो सेवा का उपयोग कर सकेंगे।
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