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कालचक्र कहता है चरैवेति-चरैवेति: राष्ट्रपति

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वाराणसी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अद्याहम वाराणसेय नगरायाम भवताम मध्ये उपस्थिताम...। कालचक्र कहता है चरैवेति चरैवेति अर्थात चलते रहो-चलते रहो। आधुनिक युग में काशी की संस्कृत विद्वता की परंपरा का देश में आदर होता है। उन्होंने कहा-काशी विद्वत परिषद का निर्णय सर्वमान्य होता है। काशी को विशेष गौरव प्राप्त है। मुंबई में महिला ट्रेन चलाने का श्रेय राज्यपाल राम नाईक को जाता है।
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सोमवार को बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में राज्यपाल राम नाईक की संस्कृत में अनुदित पुस्तक चरैवेति चरैवेति का विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की गई। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि चरैवेति चरैवेति जीवन का संदेश है। जो बैठा है उसका भाग्य बैठ जाता है। जो चलता है उसका भाग्य चलता है। पुस्तक में बताया गया है कि विपक्ष कैसे काम करता है? सत्तारुढ़ दल कैसे करता है? इसका अर्थ किसी पर टीका-टिप्पणी नहीं है।
बताया, आज मैंने लेखक के रूप में राष्ट्रपति से बोलने के लिए अधिक समय मांगा है। राष्ट्रपति लोकार्पण नहीं करते हैं, पुस्तक स्वीकार करते हैं। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने हजारों पुस्तक प्रकाशित की हैं। पहला विमोचन100 पन्ने की बापू की पुस्तिका का हुआ था। आज मेरी पुस्तक चरैवेति चरैवेति का विमोचन हुआ। संस्कृत में पुस्तक के प्रकाशन का निर्णय न्यास ने लिया। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र ने 30 दिन में पुस्तक का संस्कृत में अनुवाद किया है। इसका संपादन लखनऊ विश्वविद्यालय में संस्कृत के पूर्व प्राध्यापक और राष्ट्रधर्म के संपादक प्रो. ओम प्रकाश पांडेय ने किया है। पुस्तक की प्रस्तावना राज्यसभा सदस्य रहे डॉ. कर्ण सिंह ने लिखी है। उनके पास गया तो उन्होंने पूछा कि आपकी पार्टी में संस्कृत जानने वाले बहुत लोग हैँ। फिर मेरे पास क्यों आए। मैंने कहा अब मैं पार्टी का नहीं हूं। पुस्तक संस्कृत में है। देश-विदेश में संस्कृत के जानकारों के लिए लाभदायक होगी।
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