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गली में आज चांद निकला...

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वाराणसी। गीत-नृत्य की मनोरम प्रस्तुतियों पर युवा मन थिरका तो जोश और उत्साह से माहौल सराबोर हो उठा। बुधवार को स्वतंत्रता भवन में हुए बीएचयू विज्ञान संकाय के युवा सांस्कृतिक महोत्सव ‘आकांक्षा-2018’ में एक से बढ़कर प्रस्तुतियों पर मस्ती और धमाल का ऐसा रंग चढ़ा कि न कदमों की थिरकन थमी न तालियों की गूंज। आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे... से शुरू हुआ सफर गली में आज चांद निकला... और लगन लगी... जैसे पड़ावों से गुजरते हुए भरतनाट्यम और शिव तांडव की भावमय प्रस्तुतियों के आखिरी सोपान तक पहुंचा। मूक अभिनय और मिमिक्री के भी रंग छाए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए महिला सुरक्षा, समृद्ध भारत और जल संरक्षण का संदेश भी मुखर हुआ।
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इससे पहले दो दिवसीय ‘आकांक्षा-2018’ का शुभारंभ जाने-माने हाकी कोच गौरीशंकर सिंह ने संस्थान के निदश्ेाक प्रो. नवीन कुमार और छात्र सलाहकार प्रो. आरके सिंह की मौजूदगी में किया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची तो मस्ती और उल्लास के रंग एक के बाद एक निखरते चले गए। प्रेरणा त्रिपाठी ने ‘आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे’, अंकिता ने तुम आए तो आए मुझे याद गली में आज चांद निकला और अमित ने लगन लगी जैसे गीतों को लय में ढाला तो माहौल में सुरों की मिठास घुल गई। फिर नृत्य की भव्य प्रस्तुतियां हुईं। अर्कप्रिया दास और रश्मि बोस ने भरतनाट्यम, कल्याण अंकित राव ने शिव-शक्ति तांडव से समा बांधा। मूक अभिनय के जरिए प्रतिभागियों ने महिला सुरक्षा, जल संरक्षण, समृद्ध भारत का संदेश दिया। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमिय कुमार सामल और धन्यवाद ज्ञापन अंकुर सिंह ने किया। इस दौरान शुभम दर्जी, अंकुर कुमार, शुभम वर्मा, रितुराज, मुस्कान, तृप्ति, स्निग्धा बोस, शिबानी, अनन्या, पवन तिवारी, अश्विनी कुमार, कुमार अंकु आदि मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के अंतर संकाय उत्सव स्पंदन 2018 से पहले संस्थान स्तर पर होने वाले उत्सव का यह अंतिम आयोजन है।
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