वाराणसी। मशहूर तबला वादक अहमद जान थिरकवा और ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी की स्मृति में आयोजित बसंतोत्सव की अंतिम संध्या को गीतों से सजाया गया। संगीत परिषद काशी की ओर से रविवार को सनबीम वरुणा के हार्मोनी सभागार में आयोजित संगीत संध्या का आगाज काशी उदीयमान कलाकार आयुषी गोस्वामी के गायन से किया गया। आयुषी ने राग जोग में विलंबित एकताल में निबद्ध रचना तन मन वार दई... से किया।
कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति में द्रुत तीन ताल में निबद्ध बंदिश सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। आयुषी ने जब राग शुद्ध कल्याण में निबद्ध स्वरार्थ प्रबंध साध रे साध रे...सुनाया तो सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम का समापन मीरा के भजन सखी री में गिरिधर के रंग रंगी ... से किया। उनके साथ तबले पर गौतम चक्रवर्ती और हारमोनियम पर जमुना बल्लभ गुजराती ने संगत की। इसके बाद दूसरी प्रस्तुति में जयपुर से आए आगरा पटियाला घराने के कलाकार मोहम्मद अमान ने गायन का आगाज राग विहाग में विलंबित एकताल में निबद्ध रचना कवन ढंग तोरा सजनी...से आगाज किया। इसके उपरांत मध्य तीनताल में निबद्ध बंदिश पायलिया बाजे मेरी..., द्रुत तीन ताल में निबद्ध बंदिश आली रे मैं अलबेली सुंदर नार...सुनाया। कार्यक्रम का समापन उन्होंने ठुमरी याद पिया की आए... से किया। तबले पर रमजान हुसैन और हारमोनियम पर पं. अशोक झा ने संगत की। कार्यक्रम का संचालन डा. प्रीतेश आचार्य और धन्यवाद भोलानाथ बरनवाल ने किया। इस दौरान सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक, विनीत चोपड़ा, राजन ठुकराल, डा. रवींद्र शाह, विनोद अग्निहोत्री ने उस्ताद अहमद जान थिरकुवा तथा पद्मविभूषण श्रीमती गिरिजा देवी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का आगाज किया गया। कलाकारों को डा. रूबी शाह, रागिनी बरनवाल ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल गुर्जर, विनय जैन आदि मौजूद रहे।