ज्ञानपुर। हिंदी साहित्य परिषद एवं मनीषी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को चकसिखारी गांव में काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें रचनाकारों ने अपने काव्यपाठ से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया तो सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों की तस्वीर पेश करते हुए कुठाराघात भी किया। देर रात तक काव्य रस की फुहार से श्रोताओं का अंतस्थल चिंचित होता रहा।
काव्य संध्या का शुभारंभ डॉ. माया त्रिपाठी ने वैदिक मंगलाचरण से किया। मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। इसके बाद डॉ. राजकुमार पाठक, उमाशंकर मिश्र, रामशिरोमणि होरिल, अशोक मिश्र, भारतेंदु द्विवेदी, डॉ. सुरेश कुमार मंजुल ने एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति से सर्द माहौल में गर्मी का अहसास कराया। हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ ने अपनी रचना ‘उम्मीदों के दीये बुझा दे, आंधी की औकात नहीं, सूरज को उगने से रोके, ऐसी कोई रात नहीं...’ से खूब वाहवाही लूटी। डॉ. राजकुमार पाठक ने ‘नूतनता जीवन में आए, तन-मन सुन हरसाए, नया वर्ष यह मंगलमय हो, वरदानी बन जाए...’ के जरिए लोगों को शुभकामनाएं दीं। डॉ. सुरेश पांडेय ‘मंजुल’ ने ‘जिनके जीवन में प्रीत नहीं, वह जीव अधूरा लगता है, जिनके जीवन में गीत नहीं, वह जनम अधूरा लगता है...’ से खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर कर्मराज किसलय, कुलभूषण पाठक, जेपी मिश्र, अलका पांडेय, सूर्य प्रकाश, सुनील यादव, कन्हैयालाल दूबे, विष्णुदत्त मिश्र, पारसनाथ मिश्र, संदीप बालाजी, अर्जुन मुसाफिर, हर्षित त्रिपाठी, अनुराग दूबे, प्रतीक मिश्र, दयाशंकर आदि मौजूद रहे।