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जल परिवहन के प्रयासों को मिलेगी नई रफ्तार

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वाराणसी। गंगा में 1620 किलोमीटर लंबे इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग (वाटरवेज-1) को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस परियोजना के लिए विश्व बैंक से फंडिंग का मार्ग प्रशस्त हो गया है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की पहले से चल रहीं जलमार्ग को शुरू कराने की तैयारियों को अब नई रफ्तार मिलेगी। योजना के प्रथम फेज में वाराणसी से हल्दिया के बीच जलमार्ग विकसित किया जाना है। आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों का कहना है कि रामनगर में निर्माणाधीन मल्टी मॉडल टर्मिनल का काम इसी साल दिसंबर के अंत तक पूरा करा लिया जाएगा। इसके बाद छोटे जलपोतों के जरिए ट्रायल शुरू कराया जाएगा। 2022 से पंद्रह सौ से दो हजार टन क्षमता के बड़े मालवाहक जलपोतों का संचालन शुरू कर देने का लक्ष्य है।
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जलमार्ग एक को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने को जल परिवहन के अब तक के प्रयासों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। कैबिनेट की मंजूरी से विश्व बैंक से आर्थिक मदद की सारी रुकावटें दूर हो गई हैं। जलपरिवहन के साथ ही अब फ्रेट विलेज के सपनों को भी पंख लग सकेंगे। इलाहाबाद-हल्दिया के बीच प्रस्तावित जलमार्ग-1 परियोजना 5369 करोड़ की है। नियमत: 30 प्रतिशत कार्य होने और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही वर्ल्ड बैंक फंडिंग करता है। प्रोजेक्ट निदेशक प्रवीर पांडेय (आईडब्ल्यूएआई) ने बताया कि जलमार्ग से जुड़े 30 प्रतिशत कार्य पूरे कर लिए गए हैं। अब कैबिनेट की मंजूरी से इसकी फंडिंग की सभी रुकावटें दूर हो गई हैं।
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