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मेरो चित बसो चंद्र चकोर

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वाराणसी। पं. देवाशीष डे के ख्याल गायन की बंदिशों और भजनों से शनिवार की रात संकटमोचन का दरबार गूंज उठा। इसी के साथ दो दिवसीय भजन संध्या आरंभ हो गई। श्रीरामविवाह पंचमी के उपलक्ष्य में संकटमोचन मंदिर प्रबंधन की ओर से आयोजित मानस नवाह्न पारायण यज्ञ के क्रम में यह भजन संध्या आयोजित की गई है।
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शुभारंभ बाल कलाकार जयंतिका डे के गायन से हुआ। जयंतिका ने शुरुआत की संत तुलसी के भजन- श्रीरामचंद्र कृपालु भजुमन.. से।
इसके बाद जयंतिका ने -राम मैं तो तेरे शरण में आया गाकर संगीत प्रेमियों को मुग्ध कर दिया। तबले पर सिद्धांत मिश्र, हारमोनियम पर देवाशीष डे व मंजीरा पर रमेश कुमार सरना ने संगत की। इनके बाद पं. देवाशीष डे ने मंच संभाला। उन्होनें शुरूआत की- चित बसो चंद्र चकोर से... की। इसके बाद रंगभूमि में आई बैदेही...हाथों में लिए जयमाला... जैसे भजनों की प्रस्तुतियां यादगार बन गईं। उन्होंने इसके बाद -सखि सियावर की रंगीली झांकी... के बाद मनवा राम-राम रस पीजे... से विदा ली। तबले पर नंद किशोर मिश्र, हारमोनयिम पर जमुना वल्लभ गुजराती भइयन जी ने संगत की। इनके बाद व्यास मौर्य ने भजनों की प्रस्तुति दी। ये बाबा तुम्हारी इच्छा से द्वार तुम्हारे आया हूं... रामजी से पूछे जनकपुर की नारी...की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर दीपक सिंह, बैंजो पर महिपाल, पैड पर विकास ने संगत की। इनके बाद मुंबई से आए संजय विद्यार्थी ने पूरे मंदिर परिसर को राममय बना दिया। तबले पर पं. कुबेर नाथ मिश्र, सितार पर पं. ध्रुवनाथ मिश्र, साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव व गिटार पर अमित त्रिवेदी ने संगत की। कलाकारों को आशीर्वाद मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने दिया। संचालन राघवेंद्र पांडेय ने किया।
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