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बीएचयू के अधिकारियों को हर दिन नोटिस

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वाराणसी। बीएचयू में छेड़खानी के विरोध में धरने पर बैठीं छात्राओं पर लाठीचार्ज के बाद हुए बवाल के मामले में जिला और पुलिस प्रशासन विश्वविद्यालय के अधिकारियों को चारों तरफ से घेर रहा है। मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे एडीएम प्रशासन मुनींद्र नाथ उपाध्याय ने शुक्रवार को बीएचयू के तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओएन सिंह को नोटिस भेज कर घटनाक्रम की जानकारी मांगी है। वहीं, तत्कालीन एसीएम प्रथम, सीओ भेलूपुर और एसओ लंका को भी उन्होंने नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
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तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर को जारी नोटिस में एडीएम प्रशासन ने उनसे पूछा है कि विवाद की शुरूआत कहां से, कब हुई और सुरक्षाकर्मियों ने छात्र-छात्राओं के साथ कैसा बर्ताव किया? उनसे पांच अक्तूबर तक जवाब देने को कहा गया है। दरअसल, एडीएम प्रशासन को पांच अक्तूबर तक अपनी रिपोर्ट डीएम योगेश्वर राम मिश्र को सौपनी है। इसके लिए शुक्रवार को अवकाश के बावजूद उनका न्यायालय खुला लेकिन कोई बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा।
इसी बीच क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार 10 छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सात सुरक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। सभी से अपने बयान जल्द से जल्द दर्ज कराने को कहा गया है। एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि जिन 10 छात्रों को नोटिस जारी किया गया है, उन्होंने आंध्र प्रदेश सहित अन्य स्थानों के फोटो बीएचयू मामले से जोड़ कर सोशल मीडिया पर वायरल किए थे। इससे पहले गुरुवार को क्राइम ब्रांच ने ही पूर्व चीफ प्रॉक्टर सहित प्रॉक्टोरियल बोर्ड के 20 सदस्यों को नोटिस जारी किया था।
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उधर, लंका चौराहा पर बाइक फूंकने, पथराव, तोड़फोड़ और पत्रकारों पर लाठीचार्ज के संबंध में सुराग जुटाने के लिए कुछ दुकानदारों से पूछताछ की गई। एसटीएफ सर्विलांस की मदद से यह तस्दीक करने में जुट गई है कि 23 सितंबर की रात जहां उपद्रव हुआ, वहां कौन-कौन से मोबाइल नंबर सर्वाधिक सक्रिय रहे। इसके आधार पर उपद्रव के आरोपियों को चिह्नित किया जाएगा।
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