वाराणसी। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में शुक्रवार को नाग पंचमी पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह महिलाओं ने नागदेव की पूजा की। परंपरागत दूध और लावा चढ़ाया। गांव में अखाड़े सजे, जहां पहलवानों ने दम दिखाया। पूरे दिन विविध खेलों के आयोजन हुए, जिसमें युवाओं ने बढ़चढ़कर भागीदारी की।
रोहनिया में करनाडाड़ी स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर विराट कुश्ती और जोड़ी गदा दंगल का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश सचिव विक्की सिंह सलूजा ने पहलवानों का हाथ मिलाकर दंगल का शुभारंभ किया। दंगल में कर्नाडाड़ी, मोहन सराय, मिलकीचक, भिखारीपुर, महगांव, कुरौना, गांगपुर, बदैनी आदि गांवों के पहलवानों ने भाग लिया।
दंगल में आए अतिथियों को साफा बांधकर आयोजक संतलाल पटेल ने स्वागत किया। विजेता पहलवानों को मुख्य अतिथि बिक्की सिंह सलूजा तथा विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रधान ओमप्रकाश सिंह द्वारा पुरस्कृत किया गया। बेनीपुर अखाड़े के 80 वर्षीय श्रीधर मिश्रा ने 50 गदा फेरकर सबको चकित कर दिया। वहीं, कबड्डी, रस्सी खींच, दौड़ और कुश्ती में युवाओं ने दम दिखाया।
आराजीलाइन में नाग पंचमी के त्यौहार पर क्षेत्र के अखाड़ों में भारी भीड़ रही। जगह-जगह बच्चों ने कबड्डी खेली। गांव व विद्यालय के खेल मैदान भी गुलजार रहे। जक्खिनी, शाहंशाहपुर, राजातालाब, मुंगवार, मेहदीगंज, दीपापुर, असवारी आदि गांवों में लोगों ने हर्षोल्लास से पर्व मनाया। इससे पहले सुबह से ही महिलाओं ने घरों में दूध लावा चढ़ाकर नाग देव की पूजा की। लोगों ने पालतू जानवरों को भी सजाया।
बड़ागांव सहित आसपास के गांवों में सुबह होते ही घर की महिलाओं ने स्नान के बाद घर के पीछे दूध और लावा रखा। आसपास के तालाबों, भीटों और टीलों पर महिलाएं नाग बाबा का दर्शन करने गईं। नाग देवता के दर्शन न होने पर वहीं बने बिलों के पास मिट्टे के दीये में दूध व धान का लावा रख कर हाथ जोड़ घरों को लौटीं। तमाम लोग नाग देवता के दर्शन के लिए मंदिर और देवालयों तक गए पर नाग बाबा का दर्शन नही मिला। घर के दरवाजे पर नाग देवता का फोटो लगाकर लोगों ने पूजा-अर्चना की। वहीं महिलाओं ने पूजा पाठ के बाद घर में खीर पूड़ी व मिष्ठान बना कर नाग पंचमी का त्योहार मनाया। क्षेत्र में जगह-जगह कुश्ती दंगल व खेलकूद के आयोजन हुए। बसनी, बड़ागाँव, नामापुर, हथिवार, रसूलपुर, कूडी, अनेई, साधोगंज, विराँव, पतेर, ईश्वरपुर गाँगकला, साईपुर, बाबतपुर, ताडी आदि गांवों तथा कस्बों में भी नागपंचमी का त्योहार परंपरागत मनाया गया ।