वाराणसी। भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिये घुमाने, छूने और तुलसी दल अर्पित करने के लिए मंगलवार की शाम उमड़े सैलाब में रथयात्रा जाने वाली सड़क पैक हो गई। लयबद्ध भीड़ भक्तिभाव की गंगा की मानिंद हिलोरें मारती रही। भगवान के रथ के सारथी भक्त बने थे। एक तरफ भगवान के रथ पर लतर की रोशनी में ध्वजा-पताका लहरा रही थी तो दूसरी ओर झूले-चर्खियों पर खुशियों का शोर था। बहुएं सासू मां की उंगलियां थामकर बढ़ती रहीं तो बच्चे पिता के कंधे पर सवार होकर मेले में छाए हजार रंगों पर इतरा रहे थे।
सैर-सपाटे पर निकले भगवान की शानो-शौकत का पूरा ख्याल रखा गया। लाल फूलों, लाल परिधानों से भगवान का शृंगार किया गया। बेला, गुलाब, रजनीगंधा के फूलों से रथ चुन-चुन कर सजाया गया। राजभोग, रस मलाई, काजू की बर्फी के अलावा पकवानों का भोग लगा। आस्था की लालिमा उगते सूर्य की रश्मियों की तरह श्रद्धालुओं के चेहरे पर दमतकी रही। इस्क़ॉन मंदिर की भजन मंडली किशोरी किशोर दास के नेतृत्व में चैतन्य महाप्रभु के भजनों पर थिरकती-झूमती रही। रात आठ बजे डमरूनाद के साथ आरती उतारी गई तो सेल्फी लेने की होड़ मच गई।