संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 50 फीसदी फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कुलपति को पत्रक सौंपकर आंदोलन की चेतावनी भी दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आय बढ़ाने के लिए फीस में बढ़ोतरी का फैसला किया है। हालांकि, अभी कुलपति की सहमति के बाद इसे वित्त समिति में पारित कराना बाकी है। इसी महीने समिति की बैठक भी बुलाई गई है। दूसरी ओर इसकी भनक लगते ही छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया है।
छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण मोहन शुक्ल व महामंत्री शिवम चौबे ने राज भवन से भी शिकायत करने का निर्णय लिया है। छात्र नेताओं का कहना है कि कोरोना काल में शासन ने प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक शुल्क बढ़ाने पर रोक लगा दी है। बीएड पाठ्यक्रम में शुल्क की कटौती कर दी है। वहीं, गत दिनों विश्वविद्यालय में संकाय अध्यक्षों की बैठक में शास्त्री की फीस 900 रुपये से बढ़ाकर 1410 रुपये तथा आचार्य का शुल्क 1100 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार अंकपत्र शुल्क, क्रीड़ा शुल्क, छात्रसंघ शुल्क को भी दोगुना करने का निर्णय लिया गया है। यह सही नहीं है। छात्र नेताओं का कहना है कि संस्कृत को आधुनिक विषयों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। विश्वविद्यालय की स्थापना प्राच्य विद्या के संरक्षण के लिए हुई है। यहां पढ़ने वाले छात्रों को पहले शुल्क से अधिक छात्रवृत्ति मिलती थी। धीरे-धीरे यह परंपरा खत्म हो गई। हालांकि विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में अब भी ज्यादातर छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं।