अस्पताल में जांच के दौरान जब भी किसी गर्भवती महिला की एचआईवी जांच पॉजिटिव आती है तो वह घबरा जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें अपने साथ-साथ होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता सताने लगती है। इस पर चिकित्सकों का कहना है कि अगर गर्भवती महिला को समय से उपचार मिले तो बच्चे को संक्रमण के प्रभाव से बचाया जा सकता है। जिले में पिछले तीन साल में एचआईवी संक्रमित पचास गर्भवती महिलाओं ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। इसमें इस साल सबसे अधिक 20 महिलाएं हैं।
लोगों में जागरूकता के लिए हर साल एक दिसंबर को एचआईवी दिवस मनाया जाता है। प्रभारी सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस वर्ष की थीम असमानताओं को समाप्त करें, एड्स समाप्त करें है। इसी उद्देश्य के साथ अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। बताया कि एक गर्भवती महिला ने प्रसव पूर्व खून की जांच कराई तो एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। उसे खुद के साथ-साथ बच्चे की चिंता सताने लगी। तुरंत इस दिशा में काम शुरू किया गया और बाद में उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
मां के साथ बच्चे भी हैं स्वस्थ
दीनदयाल अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रीति अग्रवाल ने बताया कि उपचार कराने वाली 50 संक्रमित महिलाओं के साथ ही उनके बच्चे भी स्वस्थ हैं। सेंटर की ओर से निगरानी की जा रही है। वर्ष 2019 में 18, 2020 में 12 जबकि 2021 में अक्तूबर माह तक 20 एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है।
यह जानना जरूरी
गर्भवती महिला को चिकित्सक की सलाह पर समय से एचआईवी जांच करानी चाहिए।
गर्भधारण के तीसरे-चौथे महीने के बाद संक्रमण का पता चलने पर बच्चे को खतरा अधिक होता है।
एचआईवी पॉजिटिव होने पर वजन घटने लगता है, तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होने लगता है। जल्द से जल्द उपचार जरूरी है।