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काशी में टूटी 483 साल पुरानी परंपरा: लाटभैरव की रामलीला में अजान हुई, लेकिन मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ी; विरोध

Tue, 13 Oct 2026 11:31 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी के लाटभैरव की रामलीला में 483 साल पुरानी परंपरा टूट गई। जयंत नेत्र भंग लीला के दौरान इस बार नमाज अदा करने लोग नहीं पहुंचे। मुस्लिम पक्ष ने नीम के पेड़ पर अपना दावा जताते हुए विरोध किया। मस्जिद परिसर में अजान तो हुई, लेकिन नमाज नहीं पढ़ी गई। पहले रामलीला के साथ नमाज भी अदा होती थी।
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लाटभैरव की रामलीला के दाैरान का दृश्य। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल मानी जाने वाली लाटभैरव की रामलीला में मंगलवार को 483 साल पुरानी परंपरा टूट गई। आदमपुर क्षेत्र के लाट भैरव मंदिर परिसर में रामलीला के दौरान जयंत नेत्र भंग प्रसंग की लीला के समय हर साल नमाज अदा करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग इस बार नहीं पहुंचे। 

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अजान हुई, लेकिन मस्जिद परिसर में नमाज की कतार नहीं लगी। गंगा जमुनी तहजीब के इस नजारे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। मामले में मुस्लिम पक्ष का कहना है कि नीम का पेड़ हमारा है लेकिन उस पर कभी लाल चुनरी तो कभी धागा बांध दिया जाता है। इसके विरोध में ही नमाज नहीं पढ़ी गई।

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मुस्लिम पक्ष ने जताई नाराजगी

श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम में हर साल जयंत नेत्र भंग प्रसंग की लीला के दौरान एक ओर रामचरितमानस की चौपाइयां गूंजती थीं तो दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते थे। 

इस तरह दोनों समुदायों की धार्मिक परंपराएं एक ही परिसर में साथ-साथ निभाई जाती थीं। मंगलवार को शाम छह बजे अजान हुई, लेकिन मस्जिद परिसर में नमाज अदा करने कोई नहीं पहुंचा। परिसर में मौजूद लोग आसपास बैठे रहे, मगर नमाज की कतार नहीं बनी।

रामलीला समिति के प्रधान व्यास दयाशंकर त्रिपाठी ने कहा कि यह आयोजन पिछले 483 वर्षों से आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता आ रहा है। पहले के वर्षों में यहां कुरान की आयतें और रामायण की चौपाइयां एक साथ गूंजती थीं। इस बार नमाजियों के नहीं आने से परंपरा टूटी है। उन्होंने इसे रामलीला और मंदिर के प्रति विरोध के रूप में देखे जाने की बात कही। वहीं, रामलीला में मौजूद कुछ लोगों के बीच चर्चा रही कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पहले ही इस बार लीला के दौरान नमाज नहीं पढ़ने का निर्णय लिया था।

समय पर हुआ जयंत नेत्र भंग का मंचन
इस घटनाक्रम के बीच रामलीला का मंचन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहा। शाम छह बजे प्रभु श्रीराम द्वारा जयंत के नेत्र भंग के प्रसंग की लीला हुई। इसके बाद आगे की लीलाएं संपन्न हुईं।

आज की नमाज डर की वजह से नहीं हुई है। रामलीला कमेटी के लोगों ने 15 दिन से नीम के पेड़ पर चुनरी बांध रहे हैं। कभी उस पर धागा बांध दिया जाता है। कभी राम लिख दिया जाता है जबकि पेड़ मुस्लिम पक्ष का है। शिकायत पर सुनवाई नहीं होती है। पुलिसवाले धमकाते हैं इसलिए मुस्लिम पक्ष ने विरोध जताया। मगरिब की नमाज नहीं पढ़ी है। - अनीसुर्रहमान, मुतवल्ली।

नीम के पेड़ पर पिछले कई वर्षों से नवमी समेत अन्य त्योहारों पर मां शीतला की पूजा होती है। वह पेड़ हमेशा से हिंदू पक्ष का रहा है। हमारे पास इसके पूरे कागजात मौजूद हैं जिसे आपत्ति हो वह प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष बैठक कर अपने कागजात प्रस्तुत करे। - रोहित जायसवाल, संरक्षक, श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम।
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मस्जिद में नमाज किसी भी हाल में रुक नहीं सकती। रोजाना पांचों वक्त की नमाज होनी जरूरी है। एक व्यक्ति पढ़े या 100 लेकिन नमाज अदा होनी ही चाहिए। - मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, मुफ्ती-ए-बनारस।
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