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संयोग अच्छा था नहीं तो कई छात्र और राहगीर मारे जाते

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वाराणसी। बीएचयू परिसर स्थित बिड़ला ए चौराहे के समीप दो बाइकों पर सवार बदमाशों ने सरेराह जिस तरह से अंधाधुंध फायरिंग की, उससे कई छात्रों और राहगीरों की जान जा सकती थी। गौरव के साथ मौजूद छात्रों ने कहा कि संयोग अच्छा था कि अन्य लोग बाल-बाल बच गए। छात्रों ने बदमाशों ईंट-पत्थर फेंकने शुरू किए तो सभी भाग निकले।
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आशुतोष सिंह और आशीष ने बताया कि बाइक सवार बदमाश बिड़ला ए चौराहे के समीप आए और गौरव को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। आठ से दस राउंड हुई फायरिंग से भगदड़ मच गई। गोली चलने की आवाज सुन कर वहां से गुजर रहे कई राहगीर अपनी बाइक और साइकिल छोड़ कर भाग खड़े हुए। माहौल सामान्य होने पर सभी ने अपनी बाइक और साइकिल ली। उनका कहना है कि बदमाशों ने रेकी कर गौरव के बारे में सूचना एकत्रित की होगी, इसके बाद वह बिड़ला ए चौराहे के पास आए और वारदात को अंजाम दिया। उधर, लंका पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2017 में बीएचयू परिसर में हुए बवाल और आगजनी की घटना में गौरव का नाम पहली बार आया। इसके बाद अलग-अलग हिंसक घटनाओं में उसका नाम सामने आने लगा और उसके खिलाफ लंका थाने में मुकदमे दर्ज होते चले गए।
बीएचयू का सुरक्षा तंत्र फिर सवालों के घेरे में
बीएचयू में सात सौ से ज्यादा सुरक्षाकर्मी वॉकी टाकी के साथ तैनात रहते हैं। इन पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। जहां गौरव कर गोली मार कर हत्या की गई वहां से प्रॉक्टोरियल बोर्ड का कार्यालय चंद कदम दूर है। इसके बावजूद बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस घटना ने बीएचयू के सुरक्षा तंत्र की पोल खोल कर रख दी है। बिड़ला हॉस्टल के इर्दगिर्द हमेशा बवाल होता है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक यहां सीसी कैमरा नहीं लगवाया है। वहीं, ट्रॉमा सेंटर पहुंचे छात्रों ने आरोप लगाया कि घटना की सूचना चीफ प्रॉक्टर को दी गई तो उन्होंने सही से बात तक नहीं की। इसे लेकर चीफ प्रॉक्टर के प्रति छात्रों में काफी गुस्सा देखने को मिला।
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अराजक हुआ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का माहौल
शहर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का माहौल अराजक हो गया है। बीएचयू में छात्र गुटों के बीच कभी भी बवाल शुरू हो जाता है। वहीं, शहर स्थित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों द्वारा बीते साल से अब तक फायरिंग कर हत्या या हत्या के प्रयास का यह तीसरा मामला है। बीती 24 फरवरी की रात यूपी कॉलेज परिसर में छात्रनेता विवेक सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। 31 अक्तूबर 2018 को काशी विद्यापीठ के छात्र आलोक उपाध्याय और उसके तीन दोस्तों ने जेएचवी मॉल में अंधाधुंध फायरिंग कर दो लोगों की हत्या कर दी थी और दो लोगों की हत्या का प्रयास किया गया। दिसंबर 2018 में हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव परिणाम आने के बाद सप्तसागर मंडी निवासी दवा व्यापारी भाइयों के घर में घुस कर मारपीट और छेड़खानी की गई।
दोस्तों को देखकर न रुकता तो बच जाती जान
गौरव को गोली मारे जाने के दौरान उसके साथ मौजूद उसके गांव के ही आशीष ने बताया कि हमारे घर से लगातार फोन आ रहा था। गौरव और हम दोनों लोग जाने के लिए निकले, लेकिन उसके दोस्त दिख गए। इसके चलते वह रुककर उनसे बात करने लगा। गौरव न रुकता तो शायद उसकी जान बच जाती।
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