वाराणसी। होली के दूसरे मंगलवार को परंपरा के अनुसार बुढ़वा मंगल भव्य रूप से मनाया गया। देर रात तक शहनाई वादन और गायन से अस्सी घाट का मंच गूंजता रहा और बड़ी संख्या में मौजूद कलाप्रेमी तरानों में गोते लगाते रहे।
पद्मविभूषण गिरिजा देवी की शिष्या अदिति चक्रवर्ती ने ठुमरी सुनाई, जिसके बोल थे ‘तुम तो करत बरजोरी’ सुनाई। इसके बाद दादरा ‘आंखि मा भरत गुलाल रसिया...’ सुनाकर सभी को आनंदित किया। समापन चैती से किया, जिसके बोल थे- चढ़त चित चैत मास। उनके साथ तबला पर पं नंदकिशोर मिश्र और हारमोनियम पर पं. अशोक झा ने संगत की।
इससे पहले बुढ़वा मंगल की शुुरुआत प्रख्यात कलाकार सुनील प्रसन्ना के शहनाई वादन से हुई। हारमोनियम पर उस्ताद सज्जन खान और शहनाई पर मैसर अली ने साथ दिया। अगली प्रस्तुति कलाकार राजेंद्र कुमार ने दी। उन्होंने राग पुरिया धनाश्री में आलाप के साथ मध्य तीन ताल में निबद्ध गत की प्रस्तुति दी। साथ ही पारंपरिक चैती की प्रस्तुति से श्रोताओं को आनंदित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य, पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल, डॉ. रत्नेश वर्मा, पं. प्रमोद मिश्रा, विष्णु यादव ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। कार्यक्रम में डॉ. सुधीर सिंह और उनकी धर्मपत्नी सुलेखा सिंह को सर्वश्रेष्ठ युगल परिधान का पुरस्कार प्रदान किया गया। संचालन अंकिता खत्री, प्रितेश आचार्य और धन्यवाद ज्ञापन अजय गुप्त ने किया।
वंदे मातरम् समिति ने मनाया बुढ़वा मंगल
प्रणाम वंदे मातरम् समिति द्वारा गुरुधाम कालोनी स्थित जवाहर नगर में बुढ़वा मंगल पर्व के अवसर पर वरिष्ठ जनों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेश चंद्र श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। रोशन लाल सेठ, केवल सेठ, सुमित श्रास्त्री, श्रीनारायण खेमका, बीना रानी सेठ, विभूति नारायण सिंह, केवल कृष्ण कपूर, बाल मुकुंद श्रीवास्तव, प्रेमप्रकाश कपूर, रामेश्वर अग्रवाल सहित कई लोगों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मंगलेश जायसवाल, राकेश सिंह, कन्हैया सेठ, राजेश जायसवाल, प्रदीप चौरसिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन अनूप जायसवाल, संचालन मनीष चौरसिया और धन्यवाद अखिलेश सिंह ने किया।