वाराणसी। केंद्र व प्रदेश सरकार की तमाम कवायदों के बाद पीएम का संसदीय क्षेत्र स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में तीन स्थान नीचे चला गया है। शहर में चल रही स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत हो रहे कार्यों में विलंब के आधार पर यह रैंकिंग बनारस को मिली है। पिछले साल बनारस की रैंकिंग जहां नौवीं थी वहीं इस बार उसे 12वीं रैंकिंग मिलने से अधिकारियों व कर्मचारियों में भी हलचल मची हुई है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने देश भर के सौ स्मार्ट शहरों की स्मार्ट सिटी रैंकिंग शुक्रवार को जारी की है।
अधिकारियों का कहना है कि सौ शहरों में चल रही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं के क्रियान्वयन के आधार रैंकिंग की जाती है। बनारस में स्मार्ट सिटी के तहत सिटी कमांड कंट्रोल सिस्टम, चौराहों का सुंदरीकरण, रोड एंड जंक्शन का काम, पार्कों का सुंदरीकरण, कान्हा उपवन, वाल पेंटिंग, हेरिटेज लाइट सहित कई कार्य हो रहे हैं। अधिकांश कार्य अपने निर्धारित अवधि से देर से पूर्ण हो रहे हैं। इसको ही आधार बनाकर यह रैंकिंग की गई है। स्मार्ट सिटी में जारी हुए टेंडर, वर्क आर्डर और पूरे हुए विकास कार्यों के लिए अलग-अलग अंक दिए जाते हैं। जारी किए गए फंड के उपयोग के लिए भी अंक दिया जाता है। इन सारे अंकों को मिलाकर जिस शहर को जितने अंक मिलते हैं, उसके आधार पर रैंकिंग निकाली जाती है। इस बार बनारस को केवल 156.38 अंक मिले हैं। फरवरी माह के लिए जारी रैंकिंग में महाराष्ट्र का नागपुर शहर पहले, मध्य प्रदेश का भोपाल दूसरे और झारखंड का रांची तीसरे स्थान पर है। गुजरात के अहमदाबाद ने चौथे, सूरत पांचवें और वड़ोदरा छठवें स्थान पर रहा।