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वेद ज्ञान का मूल और वैदिक भाषा पहचान

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वाराणसी। बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में शनिवार को तीन दिवसीय अखिल भारतीय वैदिक सम्मेलन में विद्वानों ने वैदिक भाषाओं के संरक्षण का आह्वान किया। मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ओमप्रकाश पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत की पहचान वेद हैं, इनके संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा।
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स्वतंत्रता भवन में उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि वेद सभी ज्ञान का मूल हैं, लेकिन इनका प्रचार प्रसार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सम्मेलन में मॉडर्न साइंस के लोगों को भी बुलाने का सुझाव दिया। अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने कहा कि वेद भाषा विलुप्त होने के कगार पर हैं। आज जरूरत है कि वैदिक विद्वानों और मॉडर्न साइंस के वैज्ञानिक एक मंच पर आकर शोध करें। बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह का संदेश पढ़ा। वीरूपाल बी जद्दीपाल ने कहा कि हमें वेदों को घर-घर स्थापित करना होगा। असम के राज्य मंत्री जयंत मल्लू बरुआ ने कहा कि देश की पहचान वेद और संस्कृति से ही है, लेकिन हम विदेशी संस्कृति धारण करते जा रहे हैं। अतिथियों का स्वागत संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. कौशल पांडे, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी ने किया। समारोह में महंत राम निरंजन दास, युगल किशोर मिश्र, प्रो.सुनील मिश्र, प्रो. डीडी खान, प्रो. पीएन पांडेय, डॉ. भारतेंदु द्विवेदी, प्रो. लक्ष्मेश्वर झा, डॉ. रचना शर्मा आदि मौजूद रहे।
अस्सी घाट से बीएचयू तक निकाली शोभायात्रा
अस्सी घाट से बीएचयू स्वतंत्रता भवन तक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें रामधुन के बीच गाजे-बाजे के बीच स्काउट गाइडों के साथ ही ब्रह्मावेद विद्यालय, केदार घाट विद्या मठ, केदारनाथ गोयनका वेद विद्यालय, चिंतामणि गणेश वेद विद्यालय, स्वामी करपात्री वेद विद्यालय (धर्मसंघ) के बटुकों सहित कई लोग शामिल हुए।
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