वाराणसी। हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) की बढ़ती मात्रा बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसके बारे में दुनिया को सचेत किया है।
चिकित्सकों के अनुसार पांच साल के बच्चों को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। उनमें अस्थमा, फेफड़े से संबंधित जानलेवा बीमारी, हृदय रोग, मानसिक क्षति, जन्मजात विकृति की समस्या बढ़ रही है। हवा में पीएम 2.5 की बढ़ती मात्रा से 98 फीसदी बच्चे प्रभावित हैं। वर्ष 2016 के आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब एक लाख बच्चों की मौत ऐसी बीमारियों से हुई है, जिनका कारण प्रदूषण है।
गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी असर
हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि हवा में निर्धारित मात्रा से ज्यादा पीएम टू की मौजूदगी से गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी विपरीत असर पड़ता है। 1285 महिलाओं पर किए गए शोध से यह सामने आया है कि ऐसी प्रदूषित हवा में सांस लेने से गर्भ में पल रहे बच्चे के वजन पर भी असर पड़ता है। क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ये रिपोर्ट स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति की चेतावनी दे रही है। ऐसे में देश में राष्ट्रीय वायु कार्य नीति शीघ्र लागू किया जाना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जल्द ही एक्शन लेने की जरूरत है।