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कोहबर सून कइके कहां चल गईलु...0

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वाराणसी। एक बेहतरीन कलाकार कभी मरते नहीं। वे जिंदा रहते हैं अपनी कला से। भोजपुरी फिल्म की अभिनेत्री मनीषा राय ने शुक्रवार को इस दुनिया को अलविदा कर दिया लेकिन अपने अभिनय, अपनी फिल्मों के जरिये वो हमेशा याद की जाएंगी, हमेशा जिंदा रहेंगी। शार्ट फिल्म कोहबर से उन्हें उपलब्धि मिली लेकिन निर्माणाधीन फीचर फिल्म कोहबर ने खास लोकप्रियता हासिल की।
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बलिया में सड़क दुर्घटना में भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री मनीषा राय की शुक्रवार की रात मौत हो गई थी। उनके मौत की खबर से भोजपुरी फिल्म समाज में काफी दुख है। उनके सहयोगी, निर्देशक सभी स्तब्ध हैं। बलिया निवासी मनीषा राय काशी विद्यापीठ की छात्रा थीं। यहां से वो एमए पत्रकारिता कर रही थीं। शुक्रवार को ही वो अपना आखिरी सेमेस्टर पेपर देकर अपने घर बलिया लौटीं थीं।
मनीषा को बचपन से ही अभिनय का शौक था और भोजपुरी से लगाव। करीब छह साल पहले वो अभिनय की दुनिया में आईं। दादा साहब फालके पुरस्कार हासिल कर चुके काशी के उज्ज्वल पांडेय के साथ छह साल पहले उन्होंने अभिनय में कदम रखा। शुरुआत शॉर्ट फिल्म से की। कॉलेज के बाद पार्ट-1, पार्ट-2 के अलावा उन्होंने मिस्टर एंड मिस एट नाइट शार्ट फिल्म की। अपनी स्वर्गीय मां पर मनीषा ने एक कविता लिखी थी जिस पर मणिकर्णिका शार्ट फिल्म बनाई गई। इसमें भी उन्होंने अभिनय किया। मनीषा कविताएं भी लिखती थीं। इसलिए उनके एक साथी ने उन्हें याद करते हुए लिखा है, ‘तुम अमर हो अपनी कविताओं में, अपने सिनेमा के किरदारों में’।
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उनकी ‘एक थी कार’ शार्ट फिल्म एनडीटीवी पर प्रसारित हुई। ब्यूटीफुल और कोहबर से उन्हें खास लोकप्रियता मिली। इसे 46 लाख से अधिक लोगों ने देखा। शार्ट फिल्म कोहबर की लोकप्रियता के बाद ही निर्देशक उज्ज्वल पांडेय कोहबर फीचर फिल्म बना रहे थे। ये फिल्म 80 प्रतिशत पूरी हो गई थी। उज्ज्वल कहते हैं मनीषा के जाने से वो खालीपन आया है, उसे बयां नहीं किया जा सकता लेकिन ये फिल्म पूरी होगी और यही उसके प्रति श्रद्धांजलि होगी।
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