फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पिछड़ेपन के लिए अशिक्षा कारण0

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
वाराणसी।
समाज में महिलाओं के पिछड़ेपन का सबसे प्रमुख कारण अशिक्षा है। इसी वजह से वे अपने मूलभूत अधिकारों से भी वंचित हैं। उक्त बातें
गुरुवार को डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति सम्मान समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि युवा आईएएस स्वधा देव सिंह ने कही। स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीएचयू की स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराधा खन्ना ने कहा कि समाज में बदलाव लाना है तो लड़कियों को भी वैसे ही विकसित करना होगा जैसे लड़कों को। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सत्यदेव सिंह ने उम्मीद जताई की 2021 तक भारत में भी महिला साक्षरता सौ फीसदी तक पहुंच जाएगी।
इससे पूर्व महाविद्यालय की तरफ से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी योगदान देने वाली महिलाओं को नारी शक्ति सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर काशी की तीन बहादुर दत्ता बहनें तान्या, मिली एवं रिया के साथ-साथ डॉ. अनुराधा खन्ना व महाविद्यालय की अर्थशास्त्र विभाग की अध्यापिका डॉ. पारूल जैन को नारी शक्ति सम्मान-2018 से नवाजा गया। कार्यक्रम में स्त्री-विमर्श की वार्षिक पत्रिका ‘न्यूज लेटर’ एवं काशी जर्नल ऑफ सोशल साइंसेज का विमोचन भी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

कविताओं में उभरा महिला का संघर्ष
इस दौरान कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें कवयित्रियों ने महिलाओं की दशा एवं उनके संघर्ष को मार्मिक कविताओं के जरिए व्यक्त किया। डॉ. मंजरी पांय ने ‘खाई है चोट दिल पे संभलने तो दीजिए, हमराह बन सके नही चलने तो दीजिए’, श्रुति गुप्ता ने ‘मैं बगिया की सोन चिरईया, शाख-शाख इठलाउंगी’पेश किया। संध्या श्रीवास्तव ने ‘हर युग ने छला है मुझको हर युग में सहा है मैने’ जैसी यर्थाथवादी कविताएं सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। डॉ. रचना शर्मा ने ‘मिल ही जाती हर गली हर मोड़ पर, दीप एक हाथों में थामी औरतें’ डॉ.सविता सौरभ ने ‘कोई भी रास्ता सरल ना मिला, प्यास पथरा गई तरल न मिला’ डॉ. रेशमा खातून ने ‘अपनी हस्ती को जमाने से जुदा रखा है’ नकली फूलों से ही गुलदान सजा रखा है। जैसी कविताओं के जरिए खूब तालियां बटोरी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें