वाराणसी। ठुमरी क्वीन पद्मविभूषण गिरिजा देवी को शुक्रवार की शाम पूरब अंग की सुरों की लोच के जरिए याद किया गया। मौका था ‘भावांजलि’ का। इस मौके को अप्पा जी की शिष्या उपशास्त्रीय गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने उनकी लोकप्रिय ठुमरी और दादरा की बंदिशों से यादगार बनाया। यह संगीत निशा रोमा बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्रालि. की ओर से आयोजित की गई थी।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद फूलों से सजे भव्य मंच पर ठुमरी गायिका मालिनी अवस्थी के आते ही हर हर महादेव के जयघोष के साथ तालियों की बौछार गूंजने लगी। उन्होंने राग मिश्र खमाज में बनारसी ठुमरी से शुरुआत की। बंदिश के बोल थे- इतनी अरज मोरी मान ले पिया न जाओ परदेसवा...। इसके बाद कौन अलबेली किनार झमाझम पानी भरे री... की प्रस्तुति से उन्होंने अप्पा जी की स्मृतियों को ताजा करा दिया। इसके बाद मालिनी ने अप्पा जी के प्रिय दादरा की प्रस्तुति की। बंदिश के बोल थे- जमुनिया के डार मैं तोरि आई राजा/चांदी के गिलसिया में पानी मैं लाई/पानी के पिवइया बसै गंगा पार रे ...। अंत में उन्होंने दादरा से ही विराम लिया। बंदिश के बोल इस तरह थे- दीवाना किए श्याम क्या जादू डारा/उन गलियन में आना रे जाना/हमसे कर ना बहाना रे...। तबले पर पं. राम कुमार मिश्र ने और हारमोनियम पर पंकज मिश्र ने संगत की। इससे पहले छावनी क्षेत्र के होटल के सुसज्जित हाल में मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, सनबीम समूह के चेयरमैन दीपक मधोक, भारती मधोक ने ठुमरी साम्राज्ञी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया। संचालन अंकिता खत्री ने किया।