वाराणसी। इमाम हुसैन और शहीदाने करबला का पचासा पूरी अकीदत और एहतेराम के साथ मनाया गया। रसूल-ए-खुदा और इमाम हसन की शहादत के सिलसिले से भी अजादारों का हुजूम सदर इमामबाड़े की जानिब चलता रहा। बच्चे, बूढ़े और नौजवानाें के जुबान पर ...या हमाम-ए-हसन, या इमाम-ए-जमन की सदाएं बुलंद हो रही थीं। सदर इमामबाड़े के पास जंजीर और कमा के मातम ने माहौल को और हुसैनी बना दिया।
सुबह पहला जुलूस अंजुमन जाफरिया के सचिव मेहंदी इमाम की देखरेख में उठाया गया। रास्ते से अंजुमन अंसारे हुसैनी रसूलपुरा व अंजुमन हुसैनी रसूलपुरा ने भी अपने अपने जुलूस के साथ पचासे में शिरकत की। ताजिया, अलम, दुलदुल, आमारी, ताबूत सभी से इमाम हुसैन की याद ताजा हो रही थी। दूसरी ओर से चौहट्टा लाल खां अंजुमन आबिदिया का जुलूस अलम, दुलदुल और आमारी लेकर सदर इमामबाड़े पहुंचा। यहां सैकड़ों की तादाद में ख्वातीन दुलदुल और आमारी की जियारत कर इमाम हुसैन पुरसा दिया। रास्ते भर बड़ी तादाद में अकीदतमंद जियारत के लिए मौजूद थे। सुबह से लेकर शाम तक मुसलमान भाइयों ने इमाम हुसैन का पचासा मनाकर उन्हें खिराजे अकीदत पेश किया। दोपहर बाद अहले सुन्नत जमात फन-ए-सिपहगिरी का जुलूस लेकर सदर इमामबाड़े पहुंचे। इमाम हुसैन के रौजे पर खासी भीड़ थी। जुलूस के दौरान कई संस्थाओं की ओर से सबील लगाकर चाय पानी शरबत का इंतजाम किया था।