मां अन्नपूर्णा मंदिर में तीन दिवसीय मंडलाभिषेक के अंतिम दिन बुधवार को सतचंडी पाठ की पूर्णाहुति हुई। दक्षिण भारत और काशी के 40 वैदिक ब्राह्मणों ने विधिवत मंडलाभिषेक और चतुर्वेद पारायण किया। बंगलूरू के बाल कलाकारों ने भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी नृत्य से मां की आराधना की। मंदिर और परिसर को फूलों व विद्युत झालरों से आकर्षक सजाया गया है।
मंदिर के महंत स्वामी शंकरपुरी के आचार्यत्व में माता अन्नपूर्णा देवी के प्राण प्रतिष्ठा के वार्षिकोत्सव पर तीन दिवसीय सतचंडी पाठ सहित विविध अनुष्ठान 26 जनवरी को शुरू हुआ। 21 वैदिक विद्वानों ने पाठ किया। समापन पर विशेष पूजन के साथ सतचंडी पाठ की विधिवत पूर्णाहुति हुई। शंकरपुरी ने शृंगेरी शंकराचार्य भारती तीर्थ स्वामी और उनके उत्तराधिकारी शिष्य विधु शेखर भारती स्वामी के चित्र का विशेष पूजन किया। गणपति पूजन, पुण्यावाचन, कलातत्व आवाह्न, कला तत्व हवन, श्री अन्नपूर्णा मूल मंत्र हवन, महापुर्णाहुति, पंचामृत स्नान, कला तत्व कलश से मां अन्नपूर्णा देवी का अभिषेक और राजोपचार पूजन हुआ। शंकरपुरी महाराज ने बताया कि मां अन्नपूर्णा के 12 साल बाद पिछले साल कुंभाभिषेक हुआ था। मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित के साथ ही शृंगेरी शंकराचार्य के उत्तराधिकारी स्वामी विधुशेखर भारती के सानिध्य में नौ दिनों तक विविध अनुष्ठान हुआ था। 200 औषधियों से हवन और 12 नदियों के जल से कुंभाभिषेक हुआ था।
भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी नृत्य की मां की आराधना
श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर महागणपति मंदिर ट्रस्ट बेंगलुरु के कलाकारों ने भगवती श्रीअन्नपूर्णेश्वरी देवी की वंदना की। उन्होंने भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी नृत्य से विभोर किया। देवों की स्तुतियों से मां का चरण वंदन किया। दल में सेवा कुमारी, अनघा वी आदि शामिल रहीं। महंत शंकरपुरी ने अनुष्ठान करने वाले वैदिक विद्वानों का सम्मान किया। पूजन में मंदिर के प्रबंधक काशी मिश्रा, चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, शृंगेरी मठ के प्रधान आचार्य सीताराम शर्मा, प्रदीप श्रीवास्तव, राकेश तोमर, पं. तंगीराल, पं. लक्ष्मीश तंत्री, पं. संदीप शर्मा, पं. वसंत भट्ट, पं. चंद्रमौलि भट्ट, पं. षडानन कारखेडकर आदि रहे।