वाराणसी। बीएचयू परिसर में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। कभी छात्रावास तो कभी संकाय, विभाग और खेल के मैदान में मारपीट, पत्थरबाजी की घटनाएं होती हैं। आरोपी छात्रों पर कार्रवाई भी होती है, लेकिन बाद में समझौते को आधार बनाकर सब शांत हो जाते हैं। घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इस पर ध्यान ही नहीं दिया जाता। इसी का परिणाम है कि घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
मंगलवार रात गौरव की हत्या से पहले हवाई फायरिंग हुई। सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दी गई। इसकी शिकायत भी हुई, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने ध्यान ही नहीं दिया। माना जा रहा है कि अगर इस पर सख्त कदम उठाया जाता तो गौरव की हत्या नहीं होती। विश्वविद्यालय परिसर में बने 84 में से दो-तीन हॉस्टल ही ऐसे हैं, जिनका नाम बवाल में सामने आता है। सूत्रों के अनुसार, यहां बाहरी और निष्कासित छात्र रहते हैं।
गौरव की हत्या से नाराज छात्र घटना को प्रशासनिक अक्षमता बता रहे हैं। उनका कहना है कि कुलपति बाहरी छात्रों को निकालकर परिसर में शांतिमय माहौल बनाने का दावा करते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है। जब पहले ही धमकी की शिकायत की गई थी, तब भी ध्यान नहीं दिया गया।
चुनिंदा छात्रों पर ही होती है कार्रवाई
सिंहद्वार पर धरना देने वाले छात्रों ने कहा कि चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह को बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए कुलपति को भी बर्खास्त करने की मांग की। कहा कि जब भी कोई घटना कैंपस में होती है तो कुछ चुनिंदा छात्रों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है। छात्र अगर शिकायत करते हैं तो उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है।
डीएम-एसएसपी ने की बैठक, सुरक्षा का दिलाया भरोसा
कुलपति के निर्देश पर कुल सचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी के नेतृत्व में संकाय प्रमुख और बाद में डीएम-एसएसपी ने बुधवार को धरने पर बैठे छात्रों से बात की। इसके बाद उन्होंने कुलपति आवास जाकर प्रो. राकेश भटनागर के साथ सुरक्षा के मामले पर बैठक की। कुलपति ने डीन, डायरेक्टर, महिला महाविद्यालय की प्राचार्य को बुलाकर उनसे भी इस पर सुझाव मांगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में कुलपति ने माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। इस दौरान छात्रों को बुलाकर बातचीत की गई। छात्रों ने बाहरी छात्रों का प्रवेश रोकने और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की।