वाराणसी। जब भी बवाल होता है, बीएचयू प्रशासन बेबस नजर आता है। दो हॉस्टलों के छात्र आपस में मारपीट, पत्थरबाजी, पेट्रोल बम से हमला करते रहे, लेकिन काफी देर तक उन्हें रोकने के लिए कोई आगे नहीं आया।
विश्वविद्यालय परिसर में हर साल औसतन आठ से दस मारपीट, आगजनी, तोड़फोड़ की ऐसी घटनाएं होती हैं, जिसमें न केवल विश्वविद्यालय की संपत्ति का नुकसान होता है बल्कि छात्र भी घायल होते हैं। हर बार विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में शांतिमय माहौल बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने का दावा करता है। घटना के कुछ दिन तक छात्रावास के पास पुलिस, विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मी भी दिखते हैं, लेकिन फिर स्थिति पहले जैसी हो जाती है। सितंबर 2017 में छात्रा के साथ छेड़खानी का मामला हो या 2018 में रैगिंग और फिर कला संकाय और मेडिकल छात्राें के बीच मारपीट, आगजनी की घटना, विश्वविद्यालय प्रशासन की सभी व्यवस्थाएं फेल नजर आई। 24 फरवरी की घटना में भी ऐसा ही हुआ।
छात्रों के घर जाएगी पुलिस, अभिभावकों से होगी बातचीत
बवाल में जिन छात्रों पर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है, पुलिस की अलग-अलग टीमें उनके घर भेजी जाएंगी। इसके लिए 18 टीमों का गठन हो चुका है। टीम में शामिल पुलिस कर्मी संबंधित छात्रों के घर जाकर अभिभावकों से बातचीत करेंगे। साथ ही दो दिन में जमानत नहीं कराने पर गैर जमानती वारंट जारी होने की चेतावनी भी देंगे।