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काशी महात्म्य के जरिए जड़ों से जुड़ेंगे प्रवासी

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वाराणसी। समापन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बनारस में प्रवासी भारतीय सम्मेलन को दुनिया भर से आए लोगों के लिए खास बताया। कहा- सम्मेलन के कारण उन्हें काशी में दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता और प्रयागराज के दुर्लभ कुंभ के दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने काशी को भारतीय मान्यता, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस महात्म्य को जान कर प्रवासी अपनी जड़ों से जुड़ेंगे।
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राष्ट्रपति ने कहा- हमारे पूर्वजों ने व्यापारियों और भिक्षुओं के रूप में दक्षिण पूर्व एशिया की यात्राएं कीं। एक सदी पहले भारत के लाखों लोगों ने सात समंदर पार के लोगों को देखा था, अब तेजी से बदलते घटनाक्रमों में युवा सबसे आगे हैं। हमें अपने बंधन मजबूत करने के लिए उनके विचारों को सुनना चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में जारी व्यापक परिवर्तन भारत को दुनिया में सुपर पावर के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रपति ने विदेशों में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता, ई-वीजा, पासपोर्ट ऐप, ई-माइग्रेंट प्लेटफार्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में प्रवासियों का भारत आना, रहना और काम करना आसान होने वाला है। पिछले चार वर्षों में सरकार ने 90 हजार से अधिक भारतीयों को बचाया। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का उल्लेख कर राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष प्रवासियों के लिए खास मौका है।
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आयोजन की शुरुआत करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के प्रयासों को भी याद किया। इससे पहले मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जुगनाथ ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और समापन समारोह में मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राज्यपाल राम नाईक, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्या, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह मौजूद रहे।
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