वाराणसी। वरुणा नदी को पुनर्जीवित करने की प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का मूर्त रूप लेना आसान नहीं है। वाराणसी की अस्मिता की पहचान मानी जाने वाली असि नदी जहां नाला बन चुकी है, वहीं वरुणा भी खत्म होने के कगार पर है। शहर में डूब क्षेत्र पर अवैध कब्जे कर मकान बनाने से वरुणा कराह रही है। सपा सरकार में 201 करोड़ रुपये के कॉरिडोर की योजना से भी नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है। कॉरिडोर में 10 किमी का इलाका पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना 31 मार्च तक पूरी करने का लक्ष्य है।
इलाहाबाद में फूलपुर के नजदीक मैल्हन झील उद्गम स्थल से ही वरुणा में पानी नहीं है। गर्मी के मौसम और सिंचाई के लिए जरूरत पर ही भदोही जिले के ज्ञानपुर के पास गंगा से पानी लिफ्ट कर नदी में डाला जाता है। वाराणसी में रामेश्वर से लेकर आदि केशव घाट तक जगह-जगह वरुणा सूखी है। जहां पानी दिखता भी है वह इसमें गिरने वाले नालों का सीवर होता है। नालों को बगैर बंद किए वरुणा का पुनर्जीवन संभव नहीं है। यही नहीं, सपा के शासनकाल में नदी के डूब क्षेत्र में चिह्नित अतिक्रमण अब तक नहीं हटाए गए हैं। अतिक्रमण करने वालों को नोटिस देने के अलावा और कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है।
रामेश्वर में इस नदी की वस्तुस्थिति पर दो दिन पहले ही बीएचयू में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विजय नाथ मिश्रा ने वीडियो बनाया है। सवा मिनट के इस शूट को पीएम मोदी को भी ट्वीट किया है। उनसे इस ओर ध्यान देने की गुहार लगाई है। वीडियो में स्पष्ट है कि भगवान रामेश्वर के तीर्थ और लोटा लोटा भंटा लक्खी मेले के मशहूर इस स्थान पर वरुणा सूख चुकी है। करोड़ों रुपये खर्च करने और कॉरिडोर बनाने के बाद भी यहां पानी नहीं होने की पीड़ा को डॉ. मिश्र ने इसमें सलीके से उभारा है।
हालात बताते हैं कि वरुणा में बारह महीने पानी की व्यवस्था नहीं होने तक नदी का पुनर्जीवन नहीं हो सकता। हालांक सिंचाई मंत्री धर्मपाल की हर जिले में एक नदी को पुनर्जीवित किए जाने की घोषणा के बाद प्रभारी डीएम व सीडीओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि अब नदी के जलस्तर को बरकरार रखने के लिए कई जगह चेकडैम बनाने के अलावा पानी की व्यवस्था की जाएगी।