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डायबिटीज के खिलाफ मिलाएं कदम से कदम

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वाराणसी। कभी उम्रदराज लोगों की बीमारी कही जाने वाली डायबिटीज अब युवाओं तक फैल चुकी है। विश्व में बड़ी बीमारियों में शुमार हो चुके डायबिटीज से करोड़ों लोग पीड़ित हैं। अनियमित दिनचर्या और खान-पान की खामियों के चलते इस बीमारी का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि इस बीमारी से बचाव के लिए पहले से ही सतर्कता बरती जाए। इसी उद्देश्य से अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से 14 नवंबर को ग्लोबल डायबिटीज वॉक का आयोजन किया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग भी भागीदारी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से भारत माता मंदिर तक ये डायबिटीज वॉक निकाला जाएगा। शाम को बीएचयू सिंहद्वार स्थित मालवीय प्रतिमा से रविदास गेट पर कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा। वहीं 15 नवंबर को काशी विद्यापीठ में पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित कराई जा रही है।
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बीएचयू के प्रो. एनके अग्रवाल ने बताया कि अनियंत्रित जीवनशैली और असंतुलित भोजन की वजह से मधुमेह की संभावना बढ़ जाती है। पिछले कुछ वर्षों से इस तरह के मरीजों में वृद्धि हो रही है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के साथ ही पचास साल तक के मरीज हैं। इससे बचाव के लिए प्रतिनिधि व्यायाम के साथ ही संतुलित और समय पर भोजन करना बेहद जरूरी है।
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बीमारी के लक्षण
- डायबिटीज के मरीज को थकान अधिक लगती है। सीढ़ियां चढ़ने या पैदल चलने में परेशानी होती है।
- मरीज को प्यास अधिक लगती है और वह सामान्य से करीब तीन गुना अधिक पानी पीने लगता है।
- अनियंत्रित ब्लड शुगर त्वचा को रुखा बना देती है। जरा सी चोट लगने पर त्वचा घायल हो जाती है।
- वजन कम होना, बाल झड़ना, धुंधली दृष्टि भी इस बीमारी के लक्षण हैं।
बचाव के तरीके
- खानपान में अनियमितता नहीं होनी चाहिए। अधिक तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए।
- भोजन में अधिक मीठा, दूध, दही, मांस, मछली, आलू, चीनी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- रोजाना व्यायाम और शारीरिक श्रम करना बेहद जरूरी है। इससे शरीर की कैलोरी नियंत्रित रहती है।
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