वाराणसी। पद्मविभूषण गिरिजा देवी जीवन के अंतिम समय तक सुरों के साथ रहीं। राग और बंदिश की साधना उनके लिए ओढ़ने-बिछाने जैसा था। निधन के कुछ घंटे पहले तक वह तबला सम्राट पं. किशन महाराज के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 29 अक्तूबर को आयोजित होने वाले संगीत समारोह की तैयारी को लेकर चिंतित थीं। उन्हें पुणे में प. किशन महाराज की याद में आयोजित संगीत समारोह में प्रस्तुति देनी थी लेकिन शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था।
पद्मविभूषण पं. राजन मिश्र ने अमर उजाला से यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह महीने भर से पं. किशन महाराज की याद में पुणे में होने वाले संगीत समारोह को लेकर उत्साहित थीं। समारोह में गिरिजा देवी के साथ उनके भाई राजन मिश्र को भी प्रस्तुति देनी थी। हवाई जहाज का टिकट करा लिया गया था। मिश्र ने बताया कि वह एकमात्र ऐसी कलाकार थीं, जिनमें संगीत पूजा के रूप में समाहित था। वह संगीत से जुड़े किसी भी आग्रह को कभी भी नहीं ठुकराती थीं। उनकी तबीयत खराब थी लेकिन जब उनके सामने प्रस्ताव आया कि पं. किशन महाराज की याद में संगीता समारोह आयोजित किया गया है तो उन्होंने मुस्कुराते हुए राजन से कहा था कि ईश्वर पता नहीं क्या करेगा। जीवन का कोई ठीक नहीं लेकिन वह कार्यक्रम में हिस्सा जरूर लेंगी। टिकट करा दीजिए। मैं कार्यक्रम में खास ठुमरी पेश करूंगी। इसके लिए वह तैयारी भी कर रही थीं लेकिन तीन दिन पहले अचानक बीमारी के चलते अस्पताल जाना पड़ा। मंगलवार को अंतत: वह हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गईं।