शुक्रवार को जिले के लिए आरबीआई ने 300 करोड़ रुपये भेजे थे। अगले ही दिन शनिवार से तीन दिन का अवकाश हो गया। जितना पैसा आया था, उसके हिसाब से तमाम लोगों को एटीएम से कैश उपलब्ध हो सकता था लेकिन शनिवार और रविवार को लोग पहले के मुकाबले ज्यादा परेशान रहे। कड़ाके की सर्दी में लोग कैश के लिए इधर-उधर भटके फिर भी उनकी पैसे की कड़की कम नहीं हुई। एक बैंक के अधिकारी ने कहा, इसका कारण यह है कि कुछ बैंकों ने कैश को रोक रखा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि कैश को अंदरखाने लेन-देन कर ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही हैं। बता दें कि आरबीआई ने अब तक बनारस में करीब 500 करोड़ रुपये भेजे हैं।
उधर, बैंक अधिकारी एटीएम को लगातार चलाए जाने के दावे भी कर रहे थे लेकिन दो दिन बीत गए और 20 प्रतिशत एटीएम भी नहीं चल पा रहे हैं। जो चल रहे हैं, उसमें निजी बैंकों की संख्या अधिक है। हालांकि इनमें भी कुछ घंटे बाद ही रुपये खत्म हो गए। बाकी एटीएम रोज की तरह ही परेशान लोगों को चिढ़ाते रहे। रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे एसबीआई लहुराबीर, एसबीआई लहरतारा, इलाहाबाद बैंक विद्यापीठ, एसबीआई फातमान के एटीएम बंद मिले। दो बजे तक आईसीआईसीआई बैंक लहुराबीर, पीएनबी मलदहिया, यूनियन बैंक लहरतारा, यूको बैंक कैंट के एटीएम बंद रहे। 12:30 बजे तक एचडीएफसी रथयात्रा, यूबीआई कैंट और एसबीआई कचहरी के एटीएम में रुपये थे। कैश के संकट से जूझ रहे कई लोग ऐसे भी हैं, जो सुबह उठने के बाद सीधे बैंक और एटीएम पर लाइन लगाने पहुंच रहे हैं लेकिन घंटाें लाइन लगाने के बाद भी कैश नहीं पा रहे हैं। जिले के ग्राम्यांचल में 80 से 90 फीसदी एटीएम या तो बंद पड़े हैं या उनमें हफ्तों से ‘नो कैश’ का बोर्ड टंगा है। कछवारोड, मिर्जामुराद, चोलापुर, दानगंज, बड़ागांव, पिंडरा, सेवापुरी, रोहनिया समेत जिले के सभी इलाकों में यही हाल है।
जिले में बैंकों के पिछले दरवाजे से काला धन सफेद हो रहा है। सूत्रों की मानें तो कुछ बैंक शाखाओं में दस लाख के पुराने नोट पर 20 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया जा रहा है। खास बात यह है कि उन लोगों को ही इसका लाभ मिल रहा है, जिनके संबंधित बैंक के अधिकारियों से अच्छे संबंध है। यही कारण है कि बैंकों और एटीएम में कैश की शॉर्टेज हो रही है। शनिवार को वाराणसी व्यापार मंडल की ओर से बैंकों की कमीशनखोरी के विरोध में प्रदर्शन भी किया गया। पदाधिकारियों ने बैंकों की प्रणाली पर जमकर सवाल उठाए। आयकर विभाग की ओर से बैंकों में खातों के लेन-देन, करेंसी आने और उसके प्रयोग आदि की मॉनीटरिंग की जा रही है। आयकर विभाग के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक एक तरफ लोग लाइन में लगकर अपना समय जाया कर रहे हैं दूसरी तरफ इतनी बड़ी मात्रा में नई करेंसी बाहर कैसे आ जा रही है। विभाग की ओर से ऐसे बैंकों की भूमिका की जांच की जाएगी। बताया कि बैंकों से करेंसी बाहर जाने और आरबीआई की ओर से मिल रहे कैश को एटीएम में नियमित तरीके से नहीं डालने की जांच कराई जा रही है।