मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादन में वृद्धि हो इसके लिए किसान हरी खाद तैयार करने के लिए ढैंचा की बोआई कराने की तैयारी में लग चुके हैं। इसे लेकर शासन की ओर से लक्ष्य तय किया गया है।
गेहूं की मड़ाई के बाद खेत खाली हो गए हैं। जुलाई-अगस्त में धान की रोपाई से पहले किसान खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए हरी खाद, कंपोस्ट आदि खेतों में डालते हैं। अप्रैल में ही खेत की भराई कर मई में ढैंचा की बोआई कराएंगे। जिससे वह जोताई कराकर धान की रोपाई कर पाएंगे।
जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि खेतों की उर्वरता व उत्पादकता बनाए रखने के लिए सभी पोषक तत्वों की आपूर्ति में कार्बनिक पदार्थ जरूरी होते हैं। हरी खाद ही एक ऐसा विकल्प है जो कार्बनिक पदार्थों की कमी को दूर सकता है।
बताया कि शासन ने 260 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य तय किया है। इसकी आपूर्ति जल्द ही शुरू कराई जाएगी। बताया कि विभाग के राजकीय बीज गोदामों से बीज की बिक्री कराई जाएगी।