वाराणसी। संस्कृत के उत्थान में योगदान देने वाले विद्वानों को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में हरिहरानंद सरस्वती (करपात्री स्वामी) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार आठ साल बाद दिए गए हैं। सम्मान समारोह का आयोजन गुरुवार को विश्वविद्यालय के पाणिनी भवन सभागार में किया गया। करपात्री स्वामी पुरस्कार 2011 आचार्य रेवा प्रसाद द्विवेदी, 2012 आचार्य जगन्नाथ शास्त्री तैलंग, 2013 आचार्य रामशंकर त्रिपाठी, 2014 आचार्य गणपति शास्त्री ऐताल, 2015 आचार्य कृष्णमूर्ति घनपाठी, 2016 आचार्य राजनाथ त्रिपाठी, 2017 आचार्य नरेंद्रदेव पांडेय तथा 2018 के लिए आचार्य विशेश्वर शास्त्री द्रविड़ को दिया गया। विद्वानों को पुरस्कार स्वरूप 11 हजार रुपये, चंदन, श्रीफल, अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि जब विद्वानों का सम्मान होगा तभी राष्ट्र का गौरव बढ़ेगा। जो सम्मान करता है वह सम्माननीय होगा और जो सम्मान प्राप्त करेगा वह भी अभिनंदनीय होगा। समारोह की अध्यक्षता एवं स्वागत कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. दिलीप पांडेय ने किया। इसके बाद स्वामी करपात्री महाराज के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हेतराम कछवाह और संचालन प्रो. हरि प्रसाद अधिकारी ने किया। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. गंगाधर पंडा, प्रो. हरप्रसाद दीक्षित, प्रो. सदानंद शुक्ल, प्रो. आशुतोष मिश्र, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. विधू द्विवेदी, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विजय कुमार पांडेय, डॉ. विद्या चंद्रा, डॉ. रविशंकर पांडेय, डॉ. पद्याकर मिश्र, डॉ. सूर्यकांत, लालजी मिश्र आदि मौजूद रहे।