वाराणसी। शहर में धड़ल्ले से खटारा स्कूली बसें चलाई जा रही हैं। अप्पे और ऑटो में मानक से ज्यादा बच्चों को ढोया जा रहा है। इससे विद्यालय प्रबंधन तो आंख मूंदे ही है, तमाम अभिभावक भी लापरवाही बरत रहे हैं। स्कूली बसों के संचालन में सीबीएसई ने गाइड लाइन जारी की है, बावजूद इसके स्कूल इसका पालन नहीं कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस भी इसे लेकर बेपरवाह बनी हुई है। कोई हादसा होता है तब स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठता है और प्रशासन जागता है। अभिभावक भी सजग होते हैं और ट्रैफिक पुलिस कोरम पूरा करने के लिहाज से कुछ दिनों तक स्कूली बसों की जांच करती है।
सीबीएसई की गाइड लाइन के मुताबिक स्कूली वाहन पीले रंग के होने चाहिए और उस पर स्कूल बस लिखा होना जरूरी है, लेकिन शहर में धड़ल्ले से अप्पे और ऑटो में स्कूली बच्चों को ले जाया जा रहा है। कई बार तो इसमें मानक से अधिक स्कूली बच्चों को ठूंस कर वाहन चालक ले जाते हैं। शहर के कुछ नामी बड़े विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो कई स्कूलों में तो बगैर सत्यापन के ड्राइवरों व कंडक्टरों को रखा गया है। कई मिशनरी स्कूल भी गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे हैं।
पूर्वांचल व वाराणसी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक मधोक का कहना है कि सभी कान्वेंट स्कूलों को समय समय पर सीबीएसई द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन करने को कहा जाता है। ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से स्कूली बसों की समय समय पर जांच भी कराई जाती है।