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गंगा घाट से शुरू होंगे विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास कार्य

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वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए अहमदाबाद की कंपनी की ओर से तैयार नक्शे पर सभी विभागाध्यक्षों ने सहमति दे दी है। अब इस नक्शे का प्रजेंटेशन 29 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष होगा फिर कैबिनेट में भेज दिया जाएगा। प्रोजेक्ट का नाम श्रीकाशी विश्वनाथ संकुल या फिर देवालय संकुल होने की भी संभावना है। कॉरिडोर के नक्शे के अनुसार विकास कार्य गंगा घाट की ओर से शुरू होंगे। पहला निर्माण गंगा की ओर स्काई व्यू की तर्ज पर किया जाएगा। यही इस कॉरिडोर की पहचान बनेगा।
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गुरुवार को इसके लिए कमिश्नरी सभागार में बैठक हुई। कमिश्नर दीपक अग्रवाल की मौजूदगी में विशेषज्ञों, मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच हुई चर्चा में सड़क, बिजली, सीवर और सुरक्षा के मुद्दे पर सभी को अवगत कराया गया। इसमें प्राथमिकता के आधार पर सीआरपीएफ और पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई योजना बताई गई। सभी ने नक्शे पर सहमति जताई। कमिश्नर ने बताया कि अभी जिन विभागों का उस क्षेत्र में रोल है, अहमदाबाद की टीम ने उनके साथ ही नक्शा साझा किया है। फाइनल होने पर इस बारे में आम लोगों को बताया जाएगा। बैठक में एसएसपी आनंद कुलकर्णी, सीअरपीएफ कमांडेट एनपी सिंह सहित सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
दो ऑडिटोरियम और गेस्ट-रेस्ट रूम बनाए जाएंगे
25 हजार वर्ग मीटर में चार विशाल प्रवेश द्वार के साथ बनने वाले कॉरिडोर के बारे में मंदिर के सीईओ विशाल सिंह ने बताया कि ललिता घाट पर क्षैतिज विकास से शुरू होने वाले इस निर्माण के बाद जलासेन घाट के पास एक ओपेन ऑडिटोरियम बनेगा, वहीं पास में ही संग्रहालय तैयार कर घाट किनारे के पंप हाउस को अंडर ग्राउंड किया जाएगा। गोयनका लाइब्रेरी को विश्वस्तरीय वाचनालय बनाने का प्रावधान प्रोजेक्ट में है तो उसके बगल में ही एक वैदिक अनुसंधान केंद्र भी बनेगा। मंदिर की ओर बढ़ने पर दाहिने ओर 600 की क्षमता का एक और ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। उसके बगल में एक गेस्ट हाउस, अस्पताल और मुमुक्षु भवन तैयार करते हुए नीलकंठ गली तक निर्माण पूरा किया जाएगा। अब सरस्वती फाटक कालिका गली की ओर भव्य भोगशाला और सेवादार, पुजारी और अर्चक का रेस्ट रूम बनेगा। दुकानें बनेंगी, दर्शनार्थी सुविधा केंद्र के रूप में क्लीनिक, शौचालय, पेयजल, लॉकर और कीमती सामान सुरक्षा गृह बनाया जाएगा। एक रुद्रवन भी होगा, जिसमें चंदन और रुद्राक्ष के अलावा औषधीय और धार्मिक महत्व के सभी पौधे लगाए जाएंगे।
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दस गुना बढ़ेगा बाबा का परिसर
वर्तमान में काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 2100 वर्ग फीट है लेकिन नए नक्शे के प्रावधान में यह क्षेत्रफल दस गुना बढ़ाकर 21 हजार वर्ग फीट कर दिया जाएगा। इससे परिसर में एक बार में हजारों श्रद्धालु परिसर में खड़े होकर दर्शन-पूजन कर सकेंगे।
सीढ़ी, एस्क्लेटर और रैंप की मिलेगी सुविधाएं
नक्शे के अनुसार गंगा तट से मंदिर की ऊंचाई 330 फीट हैै। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसलिए नक्शे में सीढ़ी, एस्क्लेटर और रैंप बनाने का प्रावधान है। इससे श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन में परेशानी नहीं आएगी। वहीं उनके लिए सुगम पथ भी बनाया जाएगा।
सुरक्षा के लिए बनाए जाएंगे वाच टावर
नक्शे में परिसर के चारों ओर निगरानी के लिए वाच टावर बनाए जाएंगे। वहीं चार नंबर गेट के पास कंट्रोल रूम बनेगा। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बैरक, मेस और उनका कार्यालय होगा। इसके अलावा आग से बचाव के लिए कॉरिडोर फायर फाइटिंग की सुविधा से लैस होगा।
भवन खरीदने का काम अंतिम चरण में
कॉरिडोर के लिए भवन खरीदने का काम अंतिम चरण में है। एक-दो दिन में सभी भवन मंदिर ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन के कब्जे में आ जाएंगे। वहीं अब ध्वस्तीकरण का काम तेज हो गया है। जेसीबी भी भवनों को तोड़ते हुए नीलकंठ गली तक पहुंच गई है।
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