ज्ञानपुर। रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है। जिले के 561 गावों में 560 में जीवाश्म काफी कम हैं। एक मात्र गांव कछुआबोझ में कार्बन जीवाश्म 0.8 से एक फीसदी तक है, जबकि अन्य गांवों में यह स्थिति 0.48 है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसान खेतों में जरूरत के हिसाब से खाद का प्रयोग कर सकेंगे।
यह बातें शनिवार को डीघ के विश्वंभरपट्टी और औराई के त्रिलोकपुर गांवों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण के दौरान संयुक्त कृषि निदेशक सांख्यिकी एवं बीमा डॉ. राकेश गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरक और दवाओं के अधिकाधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घटती जा रही है। कम समय में अधिक पैदावार की लालच में किसान ऐसे उर्वरकों का प्रयोग अधिक कर रहा है। इसके बजाए देशी खाद का प्रयोग करना चाहिए। उपनिदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि विश्वंभरपट्टी में 150 और त्रिलोकपुर में 57 मृदा स्वास्थ्य कार्ड संयुक्त निदेशक ने किसानों को दिया, जबकि दो दिवसीय अभियान में 10 हजार 315 कार्ड का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड को देखकर किसान अपने खेतों में जरूरत के हिसाब से उर्वरक, देशी खाद का प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कछुआ बोझ गांव में मौर्य बिरादरी के लोग अधिक हैं। इससे वे देशी खाद का प्रयोग लगातार करते हैं। उसी के चलते उक्त गांव में जमीन की उर्वरा शक्ति बेहतर है।