वाराणसी। गंगा पर संकट गहराता जा रहा है। जलस्तर पिछले आठ साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है जबकि अभी मई और जून का महीना बाकी है। जलस्तर में गिरावट की बड़ी वजह प्रवाह न होने के कारण गंगा में आया ठहराव और अंधाधुंध भूजल दोहन बताया जा रहा है। जलस्तर में गिरावट के साथ प्रदूषण स्तर में इजाफा होने से जलीय जीव भी संकट में हैं। गंगा को रिचार्ज करने वाले नदी के किनारे स्थित जल के सोते भी अब सूखने लगे हैं।
गंगा के जलस्तर में कमी से पाट सिकुड़ते जा रहे हैं और गंगा घाटों से दूर होती जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2010 में गंगा का औसत जलस्तर 58 मीटर से अधिक था जबकि अप्रैल 2018 में यह 56.615 मीटर तक आ पहुंचा है। यह जलस्तर 24 अप्रैल 2018 को रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले पिछले आठ साल में गंगा का न्यूनतम जलस्तर नौ जुलाई 2010 को रिकॉर्ड किया गया था, जो 57.16 मीटर था।