वाराणसी। गंगा में जल परिवहन की महत्वाकांक्षी परियोजना को कछुआ सैंक्चुअरी हटाए बिना शुरू करने के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में वाराणसी के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मंथन हुआ। सात किलोमीटर की जल परिवहन के लिए आईआईटी बीएचयू, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त तकनीकी टीम को परियोजना का अध्ययन करने के लिए कहा गया है। टीम की रिपोर्ट के बाद ही गंगा में जल परिवहन की दिशा में आगे का काम होगा। इसके अलावा स्मार्ट सिटी, नमामि गंगे सहित अन्य परियोजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ कॉरपोरेट सोशल रिसपांसबिलिटी (सीएसआर) के तहत चल रही परियोजनाओं की रिपोर्ट और अगले दिनों में इसके तहत कराए जाने वाले कामों पर भी चर्चा की गई।
इलाहाबाद से हल्दिया तक 1620 किलोमीटर लंबी जल परिवहन परियोजना में बाधक बन रहे कछुआ सैंक्चुअरी को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव एके मिश्र, वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र और नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल सहित अन्य अधिकारियों के बीच मंथन में तय हुआ कि फिलहाल कछुआ सैंक्चुअर को हटाया नहीं जाएगा। संयुक्त तकनीकी टीम का गठन कर अध्ययन में इसकी संभावना तलाशी जाए कि सैंक्चुअरी को हटाए बिना जल परिवहन कैसे हो सकता है। अगर तकनीकी टीम की रिपोर्ट सकरात्मक रही तो जल परिवहन के साथ ही गंगा में क्रूज, मोटरबोट, वाटर स्कूटर सहित पर्यटकों को रिझाने के लिए अन्य योजनाओं पर काम किया जाएगा।
पांच हजार करोड़ की इस परियोजना में रामनगर में टर्मिनल तैयार हो चुका है। रामनगर से राजघाट के बीच करीब सात किलोमीटर क्षेत्र में करीब सैंक्चुअरी होने के कारण परियोजना अब तक शुरू नहीं हो पाई है।