वाराणसी। पंडित श्रीकांत मिश्र की स्मृति में आयोजित तीन दिवसीय ध्रुपद उत्सव की अंतिम निशा ध्रुपद गायन एवं पखावज वादन के नाम रही। पं. श्रीकांत मिश्र ध्रुपद फाउंडेशन एवं ध्रुपद संस्थान भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में बुधवार को आयोेजित कार्यक्रम की शुरूआत आशीष जायसवाल के ध्रुुपद गायन से हुई। आशीष ने राग यमन की अवधारणा की। इसके तहत उन्होंने आलाप, जोड़, झाला एवं चौताल में रचना प्रथम नाद सरस्वती... पेश की। पखावज पर अंकित पारीख ने संगत की।
समापन संध्या की दूसरी कड़ी में दिल्ली से पधारे गौरव शंकर उपाध्याय का एकल पखावज वादन हुआ। गौरव ने चौताल में स्तुति, परन, सादी परन, चक्करदार परन, रेला, फरमाइशी परन एवं कई घरानेदार रचनाएं प्रस्तुत की। हारमोनियम पर पं. जमुना वल्लभ जी गुजराती ने संगत की। तीन दिवसीय ध्रुपद महोत्सव का समापन ध्रुपद गायक पं. उमाकांत रमाकांत गुंदेचा के गायन एवं पं. राजशेखर व्यास के ध्रुपद एवं वीणा के बीच संवाद पर चर्चा से हुआ। संवाद के दौरान पं. राजशेखर व्यास ने ध्रुपद एवं वीणा के संबंध के बारे में जानकारी दी। संवाद के बाद भोपाल से आए सुविख्यात ध्रुपद गायक पद्मश्री पं. गुंदेचा बंधुओं का ध्रुपद गायन हुआ। उन्होंने रागचंद्रकौस में लंबा आलाप जोड़ और झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद आपने ताल में रचना चलो सखी व्रज में धूम मची है...पेश किया। इसके बाद समापन उन्होंने सुल ताल में निबद्ध बंदिश तुम हो नाथ सकल...सुनाई। पखावज पर बनारस के उभरते हुए युवा पखावज आदित्य शर्मा ने संगत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगीत के रसिक जन उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत शिखा त्रिपाठी एवं संचालन अनुराधा रतूड़ी ने किया।