वाराणसी। काशी के शिल्प को हुनरमंद हाथ देने की कवायद के तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी संस्थान (आईआईजीजे) का उद्घाटन किया। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन ने चार दिसंबर, 2017 को संस्थान की आधारशिला रखी थी।
उद्घाटन के बाद महमूरगंज स्थित सगुन लॉन में व्यापारियों, उद्यमियों एवं प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए शाह ने संस्थान का आह्वान किया कि देश की विलुप्त हो रही आभूषण की कलाओं और हुनरमंदों को संरक्षित एवं संवर्धित किया जाए। बोले, काशी की गुलाबी मीनाकारी को संजोने केसाथ इसे दुनिया भर में पहुंचाने की जरूरत है। इससे देश को आर्थिक मजबूती के साथ-साथ युवाओं को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने आईआईजीजे के अंतर्गत संचालित जेम्स ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल (जीजेईपीसी) के अधिकारियों से कहा कि आभूषण के क्षेत्र में दुनिया में उच्च तकनीक की मशीनें हैं। हमारे यहां हुनरमंद भी हैं और कला भी। इसे आगे बढ़ाएं। काशी सहित देश के कई राज्यों में परंपरागत कलाएं विलुप्त हो रही हैं, उन्हें जीवंत करने की जरूरत है। भरोसा दिलाया कि केंद्र और प्रदेश सरकार इसमें मदद करेेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कौंसिल ने संस्थान के माध्यम से काशी की लुप्त हो रही विधाओं के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है। बताया, प्रदेश सरकार के सहयोग से बीएचयू में वैदिक शोध संस्थान की स्थापना कराई जा रही है। परंपरागत कला को सीमित घरानों से बाहर निकालकर उसे विस्तार देने के उद्देश्य से 24 जनवरी को लखनऊ में ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ को लांचिग की जा रही है।
इससे पहले अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया। साथ ही कौंसिल की ओर से जारी पुस्तक का विमोचन भी किया गया। जीजेईपीसी के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल और पूर्व चेयरमैन प्रवीन शंकर पांड्या ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह उत्तर भारत का पहला और देश का पांचवां आभूषण संस्थान है। इस मौके पर आईआईजीजे के अध्यक्ष किरीत भंसाली ने धन्यवाद दिया।
इससे पहले शनिवार दोपहर बाद 3:36 बजे शाह ने फीता काटकर संस्थान का उद्घाटन किया। इस दौरान जीजेईपीसी के पूर्व चेयरमैन प्रवीन शंकर पांड्या ने आभूषण निर्माण और उसकी खूबसूरती के लिए लगाई गई मशीनों को दिखाया। जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने उनको बताया कि वाराणसी के आठ शिल्प का जीआई हो चुका है। तीन प्रक्रिया में हैं। योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर के टेराकोटा का जीआई कराने के प्रयासों से भी अवगत कराया।
ज्वेलरी पार्क बनाने का वादा
जीजेईपीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण शंकर पंड्या ने कहा कि आभूषण संस्थान के माध्यम से पूर्वांचल में काशी को बाजार के रूप में विकसित किया जाएगा। काशी को मिनी सूरत की तरह तैयार करने के साथ ही यहां ज्वेलरी पार्क बनाए जाएंगे। कहा, तीन साल में पांच एकड़ में संस्थान का भवन तैयार किया जाएगा। फिलहाल, एक-एक साल के तीन कोर्स डिप्लोमा इन ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग, ज्वेलरी डिजाइन और गुलाबी मीनाकारी तकनीक पर चलाए जाएंगे। 22 जनवरी से तीनों कोर्स की पढ़ाई प्रारंभ होगी। प्रत्येक कोर्स के लिए 65 हजार से 85 हजार रुपये तक शुल्क है। बाद में डिग्री कोर्स भी संचालित किए जाएंगे।
इस मौके पर आईआईजीजे की डायरेक्टर नमिता पांड्या ने कहा कि समय के साथ-साथ परंपरागत गहने और डिजाइनें विलुप्त होती गई। राजा-रजवाड़ों के जमाने तक इसे संरक्षित किया गया लेकिन बाद में किसी ने ध्यान नहीं दिया। काशी की गुलाबी मीनाकारी विलुप्त होने लगी। इसके जानकार मोहनलाल वर्मा के जरिए 20 कारीगारों को तैयार किया गया है। इन्हीं कारीगरों के जरिए संस्थान में युवाओें को प्रशिक्षण दिया जाएगा।