वाराणसी। हाईकोर्ट के आदेश पर रिक्त हुई ज्योतिष्पीठ पर जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद के अभिषेक को लेकर भारत धर्म महामंडल में घमासान तेज हो गया है। शंकराचार्य के चयन पर दो धड़ों में बंटे महामंडल के पदाधिकारी अलग-अलग राग अलाप रहे हैं।
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में स्वरूपानंद का अभिषेक कर लौटे उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय की अगुवाई वाले धड़े के पदाधिकारियों ने शनिवार की दोपहर प्रक्रिया को नियमानुसार बताया। रविवार को अभिषेक करने वाले धड़े के सदस्यों की परेड कराई जाएगी। पत्रकारों से बातचीत में उपाध्यक्ष ने कहा कि बहुमत से अभिषेक का फैसला लिए जाने के बाद अब सात दिसंबर को इस मसले पर मंत्री सभा की बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। उधर, अभिषेक करने वाले महामंडल के पदाधिकारियों के निष्कासन पर जनरल सेक्रेटरी, चीफ सेक्रेटरी समेत कई पदाधिकारियों ने देर शाम तक मंथन किया।
महामंडल भवन के कक्ष में पत्रकारों से बातचीत में उपाध्यक्ष सत्यनारायण पांडेय ने बताया कि हाईकोर्ट ने स्वामी ज्ञानानंद की परंपरा के तहत ज्योतिष्पीठ पर अगले शंकराचार्य के चयन के लिए महामंडल को निर्देशित किया था। इस क्रम में 24 नवंबर को बुलाई गई ऑल इंडिया कौंसिल की बैठक में पूर्ण बहुमत से तीनों पीठों के शंकराचार्यों के मार्गदर्शन और विद्वानों के अभिमत के आधार पर स्वामी स्वरूपानंद के नाम का प्रस्ताव पारित किया था।
अभिषेक में पुरी और शृंगेरी पीठ के प्रतिनिधियों के हिस्सा न लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दोनों पीठों की परंपरा के शिष्य अभिषेक समारोह में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय की ओर से सात दिसंबर को इस मसले पर मंत्री सभा की दोबारा बैठक बुलाना असंवैधानिक है। इस आशय का पत्र उनके समेत अन्य सदस्यों को भी भेज दिया गया है। अब स्वरूपानंद ही ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य होंगे। इस मौके पर उपाध्यक्ष शशिनंदन दर, ज्वाइंट सेक्रेटरी सत्येंद्र मिश्र, डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ उपाध्याय, सहायक मंत्री दिनेश मणि तिवारी, आलोक चंद्र भारद्वाज, परमेश्वर दत्त शुक्ल, राजेंद्र चौबे, वीरेंद्र तिवारी, अवधेश नारायण सिंह, श्रुति द्विवेदी उपस्थित थे।