वाराणसी। तीर्थराज प्रयाग में कल्पवास के लिए देश के कोने -कोने से साधु-संतों की टोलियां काशी पहुंचने लगी हैं। गंगा तटों पर संतों के धूने सजने लगे हैं। कहीं मढ़ियों पर त्रिशूल, डमरू लिए संतों की चौपाल लग रही है तो कहीं विदेशी पर्यटक धूनों पर संत परंपरा से परिचित हो रहे हैं। मठों, आश्रमों की ओर से संगम नगरी में शिविर लगाने का काम जल्द आरंभ होगा। पहली जनवरी से माघ मेला आरंभ होगा।
प्रयाग में लगने वाले माघ मेला की तैयारियां काशी में शुरू हो गई हैं। वैरागी संत परंपरा के 280 से अधिक शिविर संगम नगरी में लगाए जाएंगे। अखाड़ा परिषद के अलावा सातों अखाड़ों और तीनों पीठों के शंकराचार्यों के भी टेंट माघ मेला में लगाए जाएंगे। खास चौक व्यवस्था समिति के महामंत्री महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया कि वैरागी संतों की 29 नवंबर को पहली बैठक होगी। इसके बाद भूमि आवंटन पर विचार किया जाएगा।इस बीच संतों की टोलियां काशी पहुंचने लगी हैं। हरिद्वार से ईश्वरानंद गिरि नागा बाबा संतों के साथ सोमवार को काशी पहुंचे। उनके साथ रामचंद्रानंद गिरि, त्रिपुरा के अंगदानंद महाराज भी आए हैं। इसी तरह बरेली, सुल्तानपुर और पश्चिमबंगाल से भी संत काशी पहुंच रहे हैं। राणा महल घाट के अलावा दशाश्वमेध घाट, चौकी घाट पर संतों के धूने सज गए हैं।