वाराणसी। विलेज टूरिज्म को लेकर काशी के युवाआें की पहल रंग लाने लगी है। उनके प्रस्ताव को मोदी सरकार ने गंभीरता से लिया है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने ‘होप वेलफेयर ट्रस्ट’ से उनके प्रस्ताव का पूरा ब्योरा मांगा है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुमन बिल्ला ने होप की टीम से उन सात गांवों के बारेे में पूरी जानकारी मांगी है, जहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। युवाओं के अथक प्रयास और मंत्रालय की इस पहल से पूर्वांचल के गांवों को पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिल सकती है।
विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर 26 सितंबर को होप वेलफेयर ट्रस्ट के युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सात गांवों का चयन कर पीएम और प्तद्बठ्ठष्ह्म्द्गस्रद्बड्ढद्यद्गद्बठ्ठस्रद्बड्ड पर ट्विट किया था। इन गांवों में क्रांतिकारी मंगल पांडेय के गांव बलिया के नगवां के अलावा चुनार (दरगाह शरीफ मार्ग), बनारस का धन्नीपुर, दीनापुर, रामेश्वर, चिरईगांव और गोरखपुर का औरंगाबाद को शामिल किया था। इसके जरिए कोशिश यह है कि देश-दुनिया से आने वाले सैलानी क्रांतिकारी मंगल पांडेय की गौरव गाथा तो जाने ही, रामेश्वर के ऐतिहासिक पहलू से रूबरू हों। साथ ही, पूर्वांचल के इन छोटे-छोटे गांवों की कला से लोग जुड़ें और उसे बढ़ावा मिले।
होप से जुड़े दिव्यांशु बताते हैं कि गोरखपुर का गांव औरंगाबाद टेराकोटा मूर्तियों की कला के लिए प्रसिद्ध है। यहां की कृतियां देश-विदेश तक जाती हैं। रामेश्वर वो गांव है जहां भगवान राम ने स्वयं शिवलिंग की स्थापना की। पंचक्रोशी यात्रा यहां आए बिना पूरी नहीं होती। दीनापुर व धन्नीपुर गांव के फूलों की खुशबू तो पूर्वांचल भर में फैली है। रवि मिश्रा का कहना है कि हमारी कोशिश यही है कि गांवों की तरफ भी लोग आएं। वहां की कला और संस्कृति से लोग परिचित हों। मंत्रालय ने हमसे जो रिपोर्ट मांगी है वो हमने भेज दी है। इस पहल ने हमें नई ऊर्जा दी है कि हम और आगे बढ़ें।