वाराणसी। अवितोको रूम थिएटर महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को तीन भावपूर्ण नाटकों की प्रस्तुति हुई। इस दौरान दर्शकों ने रूम थिएटर से स्वयं का जुड़ाव महसूस किया। इस दौरान काव्य प्रस्तुतियों के विभिन्न रंगों में श्रोता गण सराबोर होते रहे।
पिपलानी कटरा स्थित श्री रविशंकर योग केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पहली प्रस्तुति सेतु सांस्कृतिक केंद्र की थी। नाटक का शीर्षक था मुखौटे का सच। बाजार के गणित और व्यवसायीकरण के नाम पर होने वाले शोषण से परेशान और त्रस्त एक लेखक, गीतकार और संगीतकार के जीवन के सच को उकेरने का प्रयास किया गया था। कहानी के लेखक और निर्देशक आकाश देवराज श्रीवास्तव थे। नाटक में आकाश देवराज श्रीवास्तव और आदित्य राज श्रीवास्तव ने अपने सशक्त अभिनय से लेखक के मनोभावों से उकेरा। पार्श्व सहयोग प्रकाश चंद्र जयसवाल, कामना पांडेय, सत्यम मिश्रा और श्रीयांशी पांडेय ने किया।
दूसरा नाटक था द एंट एंड द ग्रास हॉपर। उमेश भाटिया और गुंजन शुक्ला ने इसमें अभिनय किया। एक इंग्लिश निबंध के नाट्य रूपांतर और निर्देशन का दायित्व उमेश भाटिया ने निभाया था। यह नाटक दशरूपक संस्था की ओर से किया गया था। नाटक में मानवीय स्वभाव की पड़ताल की गई और स्वयं को मेहनती और दूसरे को काम चोर कहने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया गया। हर इंसान अपनी जीवनचर्या अपनी आवश्यकता के अनुसार जीने का हक रखता है। तीसरी प्रस्तुति कामायनी वाराणसी की थी। इसमें नादिरा बब्बर का लिखा नाटक सकुबाई था। इसे वीणा सहाय ने निर्देशित किया और अभिनय श्रावंती मुखर्जी का रहा। काव्य प्रस्तुतियों में उमेश भाटिया ने बेहद मार्मिक रचना का सशक्त मंचन किया। श्री अष्टभुजा मिश्रा ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की। आज के कार्यक्त्रस्म की मुख्य अतिथि वर्धा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर विधु खरे दास थीं। इस दौरान नरेंद्र आचार्य और सलीम राजा भी मौजूद रहे।