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विश्वनाथ मंदिर : कार्यपालक समिति से पं. ऋषि द्विवेदी बर्खास्त

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वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की कार्यपालक समिति से ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी को बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर उच्च स्तर पर अफसरों पर दबाव बनवाकर समिति में नियम के विपरीत अपना चयन कराने का आरोप है। शिकायत के आधार पर हुई जांच के दौरान शासन ने इनकी नियुक्ति असंवैधानिक और नियमों के विपरीत पाई गई है। मंदिर प्रशासन ने द्विवेदी की बर्खास्तगी की पुष्टि की है।
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न्यास परिषद में लिए गए फैसलों पर क्रियान्वयन का काम कार्यपालक समिति के जरिए होता है। मंदिर की नियमावली के तहत इस समिति को क्रियान्वयन कराने का अहम अधिकार दिया गया है। समिति के पदेन सभापति मंडलायुक्त होते हैं, जबकि सदस्यों में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त के अलावा न्यास की ओर से नामित दो सदस्य इस समिति में चुने जाते हैं। इनके अलावा मंडलायुक्त की संस्तुति पर जनता के बीच से बेहतर सेवा कार्य करने वाले दो व्यक्तियों को तीन वर्ष के लिए कार्यपालक समिति का सदस्य नियुक्त किया जाता है।
आठ सदस्यों वाली कार्यपालक समिति में जनता के बीच से इस बार चुने गए दो सदस्यों में पूर्व काशी नरेश डॉ. अनंत नारायण सिंह और कांची कामकोटि पीठ के बीएस सुब्रह्मण्यम मणि के नाम शामिल हैं। द्विवेदी ने शासन स्तर पर अफसरों को मिलाकर अपना चयन पद सृजन के विपरीत कार्यपालक समिति के सदस्य के रूप में करा लिया था। रिपोर्ट आने के बाद प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) अवनीश अवस्थी ने ऋषि उन्हें बर्खास्त कर दिया।
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न्यासी प्रदीप बजाज के घर कारण बताओ नोटिस चस्पा
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के सदस्य प्रदीप कुमार बजाज को शासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) अवनीश अवस्थी के निर्देश पर धर्मार्थ कार्य विभाग के सहायक समीक्षा अधिकारी ने जवाहर नगर एक्सटेंशन स्थित बजाज के घर पहुंचकर नोटिस चस्पा कराया। नोटिस चस्पा कराए जाने की कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई। बजाज को भेजे गए नोटिस में शासन ने लिखा है कि मंदिर अधिनियम की धारा 6 (2) के अंतर्गत दो स्थानीय उन प्रतिष्ठित व्यक्तियों को नामित किया जाता है, जिन्हें मंदिर के कार्यकलापों के प्रबंधन, प्रशासन का और उसमें की जाने वाली सेवा पूजा, कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठान का अच्छा ज्ञान हो। लिखा गया है कि आपके आवेदन का परीक्षण कराने पर पता चला कि आप मात्र बीए डिग्री धारक और वर्तमान में व्यापारिक संस्था के जरिए वाराणसी, कोलकाता, नोएडा और मुंबई में फैले व्यवसाय में सक्रिय हैं। उन्हें न्यास परिषद का अलग पैड बनाकर उस पर पूर्व विधायक लिखकर समानांतर व्यवस्था संचालित करने, जनता को गुमराह करने और मंदिर की छवि पर प्रतिकूल असर डालने का भी दोषी पाया गया है।
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