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आग फैल जाती तो मच जाता हाहाकार

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हंसती-खेलती जिंदगियों और मौत के मातम के बीच चंद कदमों का ही फासला रह गया था। आईपी सिगरा के बेसमेंट स्थित गोदाम में आग धधकने के बाद हालात ऐसे हो गए थे कि मुख्य रास्ते से दमकल कर्मी भी अंदर नहीं पहुंच पाए। आग थोड़ी और विकराल हुई होती तो हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाना मुश्किल था। यह हादसा दिल्ली में 1997 में हुए उपहार सिनेमा कांड की तरह हर किसी के रोंगटे खड़े कर गया। न जाने कितनी जिंदगियां आग की भेंट चढ़ जातीं। जानकारों का कहना है कि वातानुकूलित मॉल में लगे इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक उपकरण लपटों की जद में आए होते तो पलक झपकते आग इतनी तेजी से फैलती कि काबू पाना बेहद मुश्किल हो जाता। जिस गोदाम में आग लगी वह मॉल के मुख्य द्वार के पास है। तीनों ऑडी (मल्टीप्लेक्स) ऊपरी मंजिल पर हैं और सबसे अधिक आठ सौ लोग वहीं मौजूद थे। आग फैलती तो मुख्य द्वार से बाहर निकलना भी संभव नहीं हो पाता।
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सिगरा स्थित आईपी मॉल में एक तरफ आग लगी थी तो वहीं दूसरी तरफ ‘ट्यूबलाइट’ फिल्म का शो चल रहा था। करीब बीस मिनट तक ऐसा हुआ। मॉल प्रबंधन ने आग लगने की बात छिपाए रखी। न तो थियेटरों में बैठे अपने आठ सौ दर्शकों को सूचना दी और न ही पुलिस को। अपने स्तर से आग बुझाने की कोशिश नाकाम रहने के बाद आननफानन पुलिस को सूचना दी गई और फिर पुलिस के आने के बाद शो बंद कराकर दर्शकों को बाहर निकाला गया। यदि इस दौरान आग ने विकराल रूप धारण कर लिया होता तो दर्शक ऊपरी मंजिल पर ही फंस जाते। मॉल प्रबंधन की यह लापरवाही पुलिस-प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आई है। इतना ही नहीं, जिस बेसमेंट में केवल पार्किंग होनी चाहिए वहां मॉल प्रबंधन ने अवैध तरीके से गोदाम खोल रखा था।
ग्लोबस, नाइक समेत कई शोरूम के गोदाम बेसमेंट में हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो आग दोपहर 1ऱ्15 बजे ही लगी थी। मॉल प्रबंधन को तत्काल ही आग लगने की जानकारी भी हो गई थी। लेकिन, प्रबंधन ने शुरुआत में कोई तत्परता नहीं दिखाई। अपने स्तर से कर्मचारियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया लेकिन कामयाब नहीं हुए और आग फैलने लगी। तब पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना देने के साथ ही मॉल खाली कराया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सभी शो हाउसफुल थे। आर्थिक क्षति से बचनेे के लिए प्रबंधन किसी भी तरह शो नहीं रोकना चाहता था।
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छानबीन मेें मॉल का अलार्म सिस्टम भी ठीक नहीं पाया गया। आग लगने के बाद अगर अलार्म बजता तो भी लोग सतर्क हो गए होते और समय से बाहर निकल गए होते। मॉल में जो फायर हाईड्रेंट लगे थे, वे भी ठीक तरह से काम नहीं कर रहे थे। मॉल के सुरक्षाकर्मियों को आग बुझाने का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। पुलिस और अग्निशमन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक मॉल में अग्निशमन का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए।
यहां जो उपकरण थे, उनमें अधिकतर ठीक से काम नहीं कर रहे थे। मॉल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले को महज एक छोटी घटना के रूप में बताया जा रहा था। पुलिस और दमकल के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो उनसे भी असहयोग किया गया। गोदाम में क्या रखा है इसकी जानकारी भी पुलिस के सख्त होने पर दी गई।
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