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राजन-साजन मिश्र की गायकी से संगीत महाकुंभ को विराम

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वाराणसी। पिछले 96 साल से अनवरत चल रहे छह दिवसीय संकट मोचन संगीत समारोह को सोमवार के दिन एक वर्ष के लिए विराम दे दिया गया। अगले साल यह 12 अप्रैल से शुरू होगा। अंतिम दिन की प्रस्तुति बनारस घराने के पद्म पुरस्कार राजन-साजन मिश्र की गायकी, मृदंग और सितार की प्रस्तुति से हुआ। जिसको सुनने के लिए देर रात तक श्रोता उपस्थित रहे।
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हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने के लिए पहुंचे दिल्ली के कलाकार पं. प्रतीक चौधरी ने सितार वादन किया तो श्रोता भी उनका स्वागत भगवान का जयकारा लगाकर किया। उन्होंने राग रागेन्ती में अलापचारी से शुरूआत की। उनके साथ तबले पर शुभ महाराज ने संगत किया। अगली प्रस्तुति एल्ला वेंकटेश्वार राव ने मृदंग की हुई। उन्होंने आदि ताल को आधार रखकर एकल मृदंग वादन कर श्रोताओं को ताल और थाप की कला से जोड़ दिया। उनके साथ मंगलमपल्ली सूर्यदिप्ती ने संगत किया। अंतिम प्रस्तुति बनारस घराने के पद्म भूषण पुरस्कार प्राप्त पं. राजन साजन मिश्रा ने किया। इन दोनों प्रख्यात कलाकारों ने प्रभाती राग ललित से उषा के किरण का आह्वान किया। विलंबित एक ताल व तीन ताल में निबद्ध बंदिश से गायन किया। दूसरी प्रस्तुति राग ललित भटियार में तीन ताल में निबद्ध बंदिश के बाद भी कई रागों की प्रस्तुति दी। इससे श्रोता सुबह तक गायकी का आनंद लेते रहे। उनके साथ तबले पर प्रख्यात तबला वादक संजू सहाय, हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्रा ने संगत किया। संचालन पं. हरिराम द्विवेदी, प्रतिमा सिन्हा और सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
संकट मोचन संगीत समारोह में अपनी कला की प्रस्तुति के लिए भी कलाकारों को कई दौर से गुजरना पड़ता है। छह दिवसीय कार्यक्रम में एक दिन में सात से आठ कार्यक्रम ही हो पाते हैं, इससे 48 या अधिकतम 50 कलाकार अपनी प्रस्तुति दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए पूरे देश से लगभग 300 से अधिक प्रख्यात कलाकरों के आवेदन आते हैं। जिनको कई चरणों की जांच से गुजरना पड़ता है। इसका फाइनल सूची खुद मंदिर के महंत करते हैं। इस बार भी सवा तीन सौ आवेदन आए थे। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि इस परिसर में जो श्रोता होते हैं वह कोई आम श्रोता नहीं होते हैं सभी शास्त्रीय गायन के या तो जानकार होते हैं या फिर प्रेमी होते हैं। इसलिए उनकी भावनाओं को देखते हुए यहां कलाकारों का चयन किया जाता है।
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कार्यक्रम में बनाए गए शहीद स्मारक पर 75 बटालियन सीआरपीएफ ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सेकेंड इंचार्ज अजय द्विवेदी के नेतृत्व में सभी शहीदों को याद किया गया। डॉ. विजय नाथ मिश्रा ने बताया कि छह दिवसीय समारोह में बजरंग बलि की पेंटिंग के अलावा महापुरुषों की पेंटिंग लगाई गई थी। इसमें सिंदूरी पेंट वाली पेंटिंग को बहुत पसंद किया गया। किसी भक्त ने उस पेंटिंग को खरीद भी लिया है। इसके साथ ही शहीदों को याद करते हुए कलाकारों ने विभिन्न तरह के पेंटिंग बनाए थे। किसी ने डाट पेन तो किसी ने करनी से पेंटिग बनाया। अंतिम दिन मतदान की अपील के लिए कटआटट भी बनाया गया था।
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