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अप्रैल में ही घाट छोड़ने लगीं गंगा

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वाराणसी। गंगा में जल संकट की आहट अभी से दिखने लगी है। गंगा घाटों को छोड़ने लगी हैं। कई घाटों की सीढ़ियों के बाद तलहटी ही नहीं दिख रही है, गंगा की गोद में बड़े-बड़ेे टीले उभर कर आ गए हैं। अब से पहले तक गंगा में ऐसी स्थिति मई-जून में दिखती थी। इस वक्त गंगा अपने निचले स्तर से लगभग सवा मीटर ऊपर हैं। इससे जल कल विभाग की चिंता बढ़ गई है। दरअसल, जिस गति से गंगा का जलस्तर घट रहा है, उससे शहर को पानी आपूर्ति करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी में अधिकतम चेतावनी का जलस्तर 70.26 मीटर होता है जबकि खतरे का निशान 71.26 होता है। इसी तरह निचले स्तर में भी चेतावनी की सीमा 57.51 मीटर और खतरे का स्तर 57 मीटर है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 58.81 मीटर दर्ज किया गया। कर्मचारियों की मानें गंगा के जलस्तर में प्रतिदिन एक से डेढ़ सेमी की कमी हो रही है।
दूसरी ओर जलकल विभाग शहर के 20 लाख लोगों की प्यास बुझाने के लिए गंगा और दो दर्जन ट्यूबवेल चलाकर 311 एमएलडी प्रतिदिन जल की आपूर्ति करता है। इसमें 200 एमएलडी से अधिक पानी गंगा से लिफ्ट किया जाता है। ऐसे में अगर गंगा का जलस्तर कम हुआ तो शहर के ट्यूबवेल काम करना बंद कर देंगे। ऐसे में जलकल जहां अधिकतम तीन पंप चला कर पेयजल आपूर्ति कर सकता है वहीं गंगा का जलस्तर न बढ़ने पर छह पंपों से भी काम चलाना मुश्किल हो जाएगा।
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