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विद्वानों के बीच बैठने से बढ़ता है ज्ञान

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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी सभागार में शनिवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति के प्रो. मुरलीधरन शर्मा के मुख्य आतिथ्य में हुआ। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ की परंपरा को विकसित करने वाला नवयुग विश्वविद्यालय को काफी आगे ले जाएगा। इसमें युवाओं को प्रशिक्षित कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
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तिरुपति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीधर शर्मा ने बताया कि शास्त्रार्थ मानव के जीवन मार्ग को प्रशस्त करता है। विश्वविद्यालय में शास्त्रार्थ परंपरा को प्रारंभ कर एक नए शोध की प्रकृति तैयार करेगी। विशिष्ट अतिथि महामहोपाध्याय प्रो. रामयत्न शुक्ल ने दक्षिण और उत्तर भारत की विभिन्न क्षेत्रों से शास्त्रार्थ परंपरा का वर्णन किया।
काशी विद्युत परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ट त्रिपाठी ने न्याय शास्त्र की वर्तमान प्रासंगिकता को स्पष्ट करते हुए कहा कि शास्त्रार्थ संस्कृत के पुनर्जीवित के लिए सशक्त माध्यम और इस माध्यम का जन्म काशी में हुआ है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि काशी की शास्त्रार्थ परंपरा में वेद उपनिषद व्याकरण न्याय वेदांत मीमांसा और साहित्य शास्त्र की विशिष्ट परंपरा रही है अब यह परंपरा अब हर माह वाग्देवी मंदिर परिसर में आयोजित होगी जिसमें छात्रों से लेकर युवा विद्वान भाग ले सकेंगे।
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