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अब मंडुवाडीह स्टेशन का नाम होगा बनारस

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वाराणसी। सब कुछ ठीक रहा तो मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदल जाएगा। औढ़े की सभा में रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से प्रधानमंत्री के सामने मुख्यमंत्री से कहा कि जिले में वाराणसी, काशी और सिटी स्टेशन है लेकिन बनारस के नाम पर कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बनारस करने का प्रस्ताव भेजें।
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रेल राज्यमंत्री ने भाषण के दौरान गाजीपुर के बुजुर्ग गरीबन बिंद का हवाला देते हुए भोजपुरी में बताया कि कैसे आमजन को 15 लाख रुपया मिला। उन्होंने कहा कि गरीबन बताते थे कि लोग गांव की चट्टी पर मजाक उड़ाते थे कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने 15 लाख रुपये बैंक खाते में जमा कराने को कहा था, उसका क्या हुआ। इस पर गरीबन ने लोगों को समझाना शुरू किया कि पीएम मोदी ने दो लाख 25 हजार का घर दिया। दो लाख का दुर्घटना बीमा, दो लाख का सामान्य बीमा और पांच लाख का मुफ्त इलाज दिया। इसके अलावा 18 हजार का गैस कनेक्शन और 12 हजार का शौचालय दिया। कुल मिलाकर 12 लाख 60 हजार तो पीएम मोदी ने दे ही दिया है, अभी आगे और देंगे।
हालांकि घरेलू गैस सिलिंडर का कनेक्शन 18 हजार रुपये में मिलने की सिन्हा की बात को लेकर सभास्थल में मौजूद लोगों में खुसुरफुसुर होती रही। कहना था कि सिलिंडर का कनेक्शन तो कभी 18 हजार रुपये में नहीं मिलता था।
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प्रधानमंत्री के स्वागत भाषण में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और चंदौली सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि अमेरिकी प्रोफेसर ने मोदी शब्द का अर्थ बताया है मैन ऑफ डेवलपिंग इंडिया...। प्रधानमंत्री ने देश ही नहीं, दुनिया की राजनीति को एक नई दिशा दी है। मंगलवार को ही आयुष्मान भारत योजना के एक बुजुर्ग लाभार्थी ने उनसे कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से वो देख रहे हैं। ऐसा मदद करने वाला प्रधानमंत्री अब तक नहीं देखा था। पुलवामा की आतंकी घटना के बाद प्रधानमंत्री ने जो शब्द संदेश दिया है, उससे देश के युवाओं का उन पर भरोसा बढ़ा है। आतंकवाद पर कार्रवाई से हिचकना इसे बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर है और सभी इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्षों से काशी भौतिक विकास के लिए तरस रही थी। 2014 में नरेंद्र मोदी के सांसद चुने जाने के बाद इसकी शुरूआत हुई। पिछले महीने हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में दुनिया के लोगों ने काशी की आध्यात्मिकता और वैचारिकता को देखा है। प्रयागराज कुंभ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, आस्थाओं का सम्मान कैसे होता है, कुंभ मेले में सबने यह देखा है। साढ़े चार सौ साल बाद श्रद्धालुओं ने अक्षय वट का दर्शन किया। काशी और प्रयागराज की नैसर्गिक पहचान को कायम रखते हुए विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं। कुंभ में प्रयागराज और काशी में गंगा में पर्याप्त के साथ ही स्वच्छ जल उपलब्ध है और यह स्वच्छ भारत अभियान की मुहिम का नतीजा है। प्रयागराज में गंगा जल स्वच्छ देख कर मारीशस के प्रधानमंत्री और उनके साथ आए चार सौ लोगों ने गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई।
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