ज्ञानपुर। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समेत कई श्रमिक संगठनों ने मंगलवार को श्रम विभाग कार्यालय पर धरना देकर मजदूरों के हित में आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर मजदूर व किसान विरोधी नीतियों को लागू करने का आरोप लगाया। कहा कि कंपनियों में विदेशी पूंजी निवेश के रास्ते खोल कर मजदूरों के पेट पर लात मारने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित नौ सूत्री मांगों का ज्ञापन सहायक श्रमायुक्त को सौंपा।
भाकपा, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन, किसान सभा, लाल झंडा बीड़ी कामकार संगठन के कार्यकर्ता मंगलवार को श्रम विभाग कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि असंगठित मजदूरों की कल्याणकारी योजनाओं को शत प्रतिशत लागू न करना सरकार की साजिश है। धरनारत लोगों ने सांप्रदायिक शक्तियों पर कार्रवाई की मांग के साथ ही लाभांश वाले नौ रत्न उद्योगों के निजीकरण पर रोक, श्रम कानूनों के बदलाव पर रोक और श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की। साथ ही असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 55 वर्ष के बाद सात हजार पेंशन, केंद्र और प्रदेश सरकारों को अलग से किसान आयोग गठित करने, बीड़ी मजदूरों को 140 रुपये प्रति हजार मजदूरी, श्रमिक रजिस्ट्रेशन का सरलीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी सुविधाएं लागू करने की मांग की। इसके अलावा मेहनतकश मजदूरों का न्यूनतम वेतन 20 हजार करने की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा हिक मजदूरों की आवाज हमेशा बुलंद की जाती रहेगी। इस मौके पर सुशील कुमार श्रीवास्तव, ओमप्रकाश यादव, शोभनाथ गौतम, पंधारी यादव, राजेंद्र प्रसाद कन्नौजिया, उर्मिल देवी इंद्रावती, अमरावती, पारसनाथ बिंद, सुशीला, दीन दयाल, उमाशंकर आदि मौजूद रहे।